1.17 करोड़ का नंबर! बोली जीतकर भागा शख्स, मंत्री ने कहा - IT से जांच कराओ...
हरियाणा में VIP नंबर HR88B8888 के लिए हिसार के सुधीर कुमार ने 1.17 करोड़ की रिकॉर्ड बोली लगाई, फिर भुगतान से इनकार कर दिया। बेस प्राइस 50,000 था, 45 लोगों ने बोली लगाई थी। डेडलाइन तक पैसा जमा न होने पर विभाग ने बोली रद्द कर 11,000 रुपये की सिक्योरिटी जब्त कर ली। परिवहन मंत्री अनिल विज ने उनकी आय और संपत्ति की जांच और आयकर विभाग से जांच के आदेश दिए हैं। दोबारा नीलामी में यह नंबर 26.71 लाख में बिका।

हरियाणा में एक VIP वाहन नंबर की नीलामी ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। नंबर था HR88B8888, जिसके लिए हिसार के एक व्यक्ति ने 1.17 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ बोली लगाई और फिर भुगतान करने से इनकार कर दिया। अब राज्य सरकार ने बोली लगाने वाले की संपत्ति और आय की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह मामला चरखी दादरी जिले के बाढड़ा सब-डिवीजन का है। हरियाणा में फैंसी और VIP नंबर केवल fancy.parivahan.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन नीलामी के जरिए ही दिए जाते हैं। हर हफ्ते होने वाली इस नीलामी में इस बार HR88B8888 नंबर चर्चा में था। इस नंबर का बेस प्राइस सिर्फ 50,000 रुपये रखा गया था। नीलामी में भाग लेने के लिए 1,000 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस और 10,000 रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देना अनिवार्य था।
26 नवंबर को हुई ऑनलाइन नीलामी में कुल 45 लोगों ने बोली लगाई। इनमें हिसार निवासी सुधीर कुमार ने सबसे ऊंची बोली लगाई। सुधीर, रोमुलस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक ट्रांसपोर्ट और IT कंपनी के डायरेक्टर हैं। उन्होंने 1 करोड़ 17 लाख रुपये की बोली लगाकर यह नंबर जीत लिया। यह भारत में किसी भी वाहन नंबर के लिए लगी अब तक की सबसे बड़ी बोली मानी जा रही थी। नियमों के मुताबिक विजेता को तय समय सीमा के अंदर पूरी राशि जमा करनी थी, लेकिन सुधीर तय डेडलाइन तक पैसा जमा नहीं कर पाए। परिवहन विभाग ने उनकी बोली को रद्द कर दिया और उनकी 11,000 रुपये की सुरक्षा राशि जब्त कर ली।
बोली रद्द होने के बाद यह मामला हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज तक पहुंचा। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि नीलामी में बोली लगाना कोई शौक नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। विज ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति 1.17 करोड़ की बोली लगाता है, तो यह जांचना जरूरी है कि क्या उसके पास वास्तव में इतनी वित्तीय क्षमता है या वह सिर्फ दिखावे के लिए बोली बढ़ा रहा है। मंत्री अनिल विज ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को सुधीर कुमार की आय के स्रोत, संपत्ति और आर्थिक स्थिति की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने आयकर विभाग को भी लिखित अनुरोध भेजने को कहा है ताकि उनकी वित्तीय हैसियत का सत्यापन हो सके।
विज का कहना है कि ऐसी जांच से भविष्य में कोई भी व्यक्ति बिना आर्थिक क्षमता के सिर्फ कीमत बढ़ाने के लिए बोली नहीं लगाएगा, जिससे सरकार के राजस्व को नुकसान होता है। उधर, सुधीर कुमार ने अपनी सफाई में दो कारण बताए हैं। पहला, उन्होंने कहा कि उन्होंने शनिवार रात दो बार भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाया। दूसरा, उनके परिवार वाले इस नंबर पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के खिलाफ हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि घर के बड़े-बुजुर्गों का मानना है कि एक नंबर प्लेट पर 1.17 करोड़ खर्च करना समझदारी नहीं है। सुधीर ने यह भी कहा कि वह जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं और सरकार को सहयोग करेंगे। उनके वकील सुनील कुमार ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गैर-कानूनी नहीं किया है।
इस नंबर की इतनी ऊंची बोली लगने की एक वजह इसका पैटर्न भी है। HR का मतलब हरियाणा राज्य, 88 का मतलब चरखी दादरी RTO कोड और B सीरीज के बाद 8888 आता है। बड़े अक्षरों में देखने पर B भी 8 जैसा लगता है, जिससे पूरी प्लेट पर लगातार सात 8 दिखते हैं। ज्योतिष और वास्तु में 8 नंबर को बेहद शुभ और ताकतवर माना जाता है। बोली रद्द होने के बाद इस नंबर की दोबारा नीलामी 10 दिसंबर को हुई, जिसमें इसकी कीमत में भारी गिरावट देखी गई। इस बार सुषमा नाम की एक महिला ने 26.71 लाख रुपये में इसे खरीद लिया। यानी सरकार को इस एक नीलामी से सीधे तौर पर करीब 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ। परिवहन विभाग अब नीलामी प्रक्रिया को और सख्त बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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