कर्मचारियों के डीए भुगतान पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, पंजाब के मुख्य सचिव फिर तलब
कर्मचारी और पेंशनर्स लंबित डीए किश्तों व एरियर की मांग कर रहे हैं। हाई कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के अनुसार समय पर भुगतान न होने पर बकाया राशि पर 6% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। इस मुद्दे को लेकर अगस्त-सितंबर में राज्यव्यापी आंदोलन हुआ था।

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए के मामले में मुख्य सचिव से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कल फिर सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें मुख्य सचिव को भी हाजिर रहना होगा। उच्च न्यायालय ने सरकार को 15 दिन में बकाया डीए देने के आदेश दिए थे, लेकिन पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। वहां अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की तरफ से उच्च न्यायालय में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा पेश हुए। इस मामले में उच्च न्यायालय ने कहा था कि अगर पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई शुरू नहीं करा सकती, तो वह इस केस की सुनवाई करेंगे। इसके बाद पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को तलब कर लिया था।
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स डीए की लंबित किश्तों और उनके एरियर की मांग कर रहे हैं। विवाद का एक महत्वपूर्ण आधार 6वें पंजाब पे कमीशन की सिफारिश है, जिसमें डीए को केंद्र सरकार के पैटर्न पर जारी रखने की बात स्वीकार की गई थी। 3 अगस्त के आदेश में उच्च न्यायालय ने 15 दिन के भीतर लंबित डीए किश्तें जारी करने को कहा था। कोर्ट ने निर्देश दिया कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज लगेगा, जो निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद से वास्तविक भुगतान तक होगा।
कर्मचारी संगठन लंबित डीए किश्तों और एरियर के भुगतान की मांग जारी रखे हुए थे। अगस्त-सितंबर में इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन भी हुआ। 8 सितंबर को सरकार ने आंदोलन के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों के लिए ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश जारी किया। इसके बाद उनकी चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा से बैठक हुई, जिसके बाद सीएम से बैठक का रास्ता साफ हुआ।





