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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:34 · नई दिल्ली संस्करण

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हिरासत में आत्महत्याओं और जेल हिंसा पर मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हिरासत में आत्महत्याओं और जेल हिंसा पर मांगी रिपोर्ट

चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की 'जेल सांख्यिकी भारत 2024' में सामने आए चिंताजनक निष्कर्षों का स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य में हिरासत में आत्महत्याओं और जेल हिंसा पर एक रिपोर्ट मांगी है।

एनसीआरबी ने हरियाणा की जेलों में आत्महत्याओं, अप्राकृतिक मौतों, जेल हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य संकट, भीड़भाड़ और अपर्याप्त मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणालियों की बढ़ती घटनाओं को एक गंभीर मानवाधिकार चिंता के रूप में लिया है।

न्यायमूर्ति ललित बत्रा (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में और सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पीठ ने वरिष्ठ राज्य अधिकारियों से स्पष्टीकरण और रिपोर्ट मांगने का एक विस्तृत आदेश पारित किया।

आयोग ने पाया कि कैदियों और विचाराधीन कैदियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गरिमापूर्ण जीवन जीने, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के संवैधानिक अधिकारों से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे कारावास में हैं।

आयोग के समक्ष रखी गई समाचार रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 2024 में कैदियों की 15 अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं और इन सभी मौतों का कारण आत्महत्या बताया गया।

रिपोर्ट में आगे खुलासा हुआ कि हरियाणा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां जेल परिसर के अंदर हथियारों से संबंधित हिंसक झड़पें दर्ज की गई हैं।

जेलों में मानसिक तनाव, अवसाद, अलगाव संबंधी समस्याएं, हिंसक झड़पें, भीड़भाड़ और पर्याप्त परामर्श सुविधाओं की कमी के संबंध में गंभीर चिंताओं को भी उजागर किया गया।

अपने आदेश में आयोग ने कहा कि हिरासत संस्थानों पर कैदियों को आत्महानि, मानसिक आघात, हिंसा, अवसाद और सामाजिक अलगाव से बचाने का संवैधानिक दायित्व है।

इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया कि समय पर मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप, नियमित परामर्श, मनोरोग संबंधी निगरानी, भावनात्मक पुनर्वास, शिकायत निवारण तंत्र, पारिवारिक सहायता प्रणाली और नशामुक्ति उपचार के माध्यम से हिरासत में आत्महत्या की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

आयोग ने विशेष रूप से हरियाणा जेल नियम, 2022 के नियम 299 और 300 का उल्लेख किया, जिनमें आत्महत्या की रोकथाम और आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले कैदियों की निगरानी से संबंधित सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

आयोग ने यह भी याद दिलाया कि हरियाणा की विभिन्न जेलों, विशेष रूप से कुरुक्षेत्र जिला जेल में किए गए पिछले निरीक्षणों के दौरान महिला कैदियों ने खुलासा किया था कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्शदाता महीने में केवल एक बार जेल परिसर का दौरा करते थे।

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