पीयूष गोयल ने गिनाए कांग्रेस के 'रिवॉर्ड', चुनाव आयुक्तों को दिए राजनीतिक इनाम, राहुल को बताया 'रेड फ्लैग'
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के चुनाव आयोग वाले इतिहास पर सवाल उठाए। गोयल ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व CEC टीएन शेषन को 1999 में आडवाणी के खिलाफ टिकट दिया, और दूसरे CEC एमएस गिल को पद पर रहते हुए 2000 में पद्म विभूषण दिया, फिर UPA में कैबिनेट मंत्री बनाया। दो अन्य CEC को राज्यपाल भी बनाया। उन्होंने राहुल को 'सबसे बड़ा रेड फ्लैग' बताते हुए पूछा कि अगर सबूत हैं तो हलफनामा देकर EC में शिकायत क्यों नहीं करते?

नई दिल्ली: चुनाव आयोग और वोट चोरी के आरोपों को लेकर राहुल गांधी और विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति से मिलने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर पलटवार किया है और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाए हैं। पीयूष गोयल ने कहा, "कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने खुद के रिकॉर्ड को भूल जाती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक रिवॉर्ड दिए हैं। गोयल ने कांग्रेस के इतिहास के 4 उदाहरण गिनाए:
1. टीएन शेषन को टिकट: गोयल ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) टीएन शेषन की ईमानदारी और निडरता की बार-बार तारीफ की, लेकिन बाद में उन्हें 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वा दिया। क्या यह उनके कार्यकाल के लिए इनाम नहीं था? 2. एमएस गिल को पद्म विभूषण और फिर कैबिनेट मंत्री: दूसरा बड़ा आरोप पूर्व CEC एमएस गिल को लेकर है। गोयल ने कहा, "एमएस गिल 1996 से 2001 तक 5 साल तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। दिलचस्प बात यह है कि 2000 में, जब वह मौजूदा CEC के पद पर थे, तभी उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण दिया गया। क्या यह प्रलोभन नहीं था? क्या यह एक तरह की रिश्वत नहीं थी?" इसके बाद गिल कांग्रेस में शामिल हुए और UPA सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
3. दो CEC को राज्यपाल बनाया: गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कार्यकाल पूरा होने के बाद दो पूर्व CEC को राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया था। 4. केरल के अधिकारियों का उदाहरण: इसके अलावा उन्होंने केरल के दो चुनाव अधिकारियों का नाम लिया - टीकाराम मीणा, जो बाद में राजस्थान में कांग्रेस की घोषणापत्र कमेटी में शामिल हो गए, और रतन यू केलकर, जिन्हें चुनाव के तुरंत बाद केरल के मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया। पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को "सबसे बड़ा रेड फ्लैग" बताया और कहा कि उनका आचरण बचकाना है जो संविधान के हर पहलू को ध्वस्त करता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और ममता बनर्जी दोनों ही इस मामले में गलत हैं।
गोयल ने राहुल गांधी से 10 सवाल पूछे और चुनौती दी कि अगर उनके पास चुनाव में अनियमितता के सबूत हैं तो वे सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाएं और शपथ पत्र के साथ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने पूछा कि राहुल ने अभी तक चुनाव आयोग को हलफनामा क्यों नहीं दिया? यह "शूट एंड स्कूट" वाली राजनीति है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर SIR (वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया इतनी ही खराब है, तो कांग्रेस ने बिहार और पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान इसे क्यों नहीं उठाया? गोयल ने बचाव करते हुए कहा कि NDA सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया है और किसी भी आयुक्त को उसकी सेवा के बदले राजनीतिक पद का ऑफर नहीं दिया। उन्होंने 2023 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए कानून का भी जिक्र किया, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति बनाई गई है।




