राहुल गांधी की सबसे बड़ी चूक: गुस्सा तो दिखा, वोट में बदलना नहीं आया, कांग्रेस का मिस मैनेजमेंट

भारतीय राजनीति में एक कहावत है - सत्ता के खिलाफ लहर बनती नहीं है, बनाई जाती है। एंटी-इनकंबेंसी अपने आप वोट में नहीं बदलती, उसे भुनाना पड़ता है। और यही वो आर्ट है जो राहुल गांधी लगातार मिस कर रहे हैं। दरअसल एंटी-इनकंबेंसी के दो बेसिक नियम होते हैं। पहला, जनता सरकार से नाराज है तो उसे ये भरोसा दिलाओ कि विकल्प बेहतर है, कमजोर नहीं। दूसरा, नाराजगी को एक चेहरे, एक मुद्दे पर फोकस करो, सौ मुद्दों में मत बांटो। राहुल गांधी दोनों पर फेल होते दिखे।
पिछले दस सालों में मोदी सरकार के खिलाफ मौके कम नहीं आए। बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक, अग्निवीर जैसे मुद्दों पर जमीन पर गुस्सा था। लेकिन कांग्रेस ने इस गुस्से को आंदोलन में बदलने की बजाय प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल दिया। राहुल गांधी ने यात्रा तो की, भारत जोड़ो यात्रा से छवि भी सुधरी, लेकिन यात्रा खत्म होते ही संगठन फिर सो गया। एंटी-इनकंबेंसी को भुनाने के लिए बूथ लेवल पर कार्यकर्ता चाहिए, पन्ना प्रमुख चाहिए, जो BJP के पास है और कांग्रेस के पास नहीं।दूसरी बड़ी चूक नैरेटिव की है। जब जनता महंगाई से परेशान है, तो उसे जाति जनगणना और अडानी के आंकड़े समझ नहीं आते।
राहुल गांधी का हर भाषण डेटा, किताब और विदेशी उदाहरणों से भरा होता है, जबकि वोटर को एक सीधी लाइन चाहिए - हम आएंगे तो क्या बदलेंगे? BJP ने 2014 में ये बेसिक किया था - अच्छे दिन, 15 लाख नहीं तो भरोसा तो दिया। कांग्रेस आज भी सिर्फ ये बता रही है कि मोदी क्या गलत कर रहे हैं, ये नहीं बता रही कि वो क्या सही करेगी। नेगेटिव कैंपेन से एंटी-इनकंबेंसी पैदा होती है, पॉजिटिव विजन से वोट मिलता है। तीसरा, राहुल गांधी एंटी-इनकंबेंसी को पर्सनल बैटल बना देते हैं। मोदी vs राहुल करने से फायदा हमेशा सत्ता पक्ष को होता है क्योंकि प्रधानमंत्री का कद बड़ा है।
अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ सोनिया गांधी ने कभी खुद को प्रोजेक्ट नहीं किया था, मनमोहन सिंह को आगे रखा। आज कांग्रेस के पास कोई मुख्यमंत्री चेहरा नहीं, कोई दूसरा चेहरा नहीं। हर चुनाव में सिर्फ राहुल ही हैं।आर्ट ये है कि जनता की नाराजगी को अपनी जीत में बदलो। राहुल गांधी अभी भी नाराजगी को दिखा रहे हैं, बदल नहीं पा रहे। और जब तक ये बेसिक नहीं सीखेंगे, एंटी-इनकंबेंसी सिर्फ अखबार की हेडलाइन रहेगी, बैलेट बॉक्स में नहीं बदलेगी।





