व्यापारियों की आपत्ति पर दिपके का जवाब- प्रोटेस्ट नहीं शटडाउन से टूटती है व्यापारियों की कमर...
दिल्ली में व्यापारियों के बंद पर छिड़े विवाद पर दिपके ने जवाब दिया। कुछ व्यापारी संगठनों ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट से बिक्री पर असर पड़ेगा। इस पर दिपके अध्यक्ष ने कहा, "नुकसान प्रोटेस्ट से नहीं, सरकारी शटडाउन से होता है।" उन्होंने कहा कि जीएसटी नोटिस और 40% लाइसेंस फीस बढ़ोतरी से 7 लाख व्यापारी परेशान हैं। सरकार अगर मांगें नहीं मानती तो प्रोटेस्ट भूख हड़ताल में बदलेगा।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में व्यापारियों के बंद के ऐलान के बीच अब सियासत तेज हो गई है। व्यापारियों के एक बड़े संगठन ने सरकारी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का विरोध करते हुए कहा था कि इससे बाजार का माहौल खराब होगा। इस आपत्ति पर अब दिपके (दिल्ली इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन एंड कॉमर्स एकता) के अध्यक्ष ने तीखा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि नुकसान शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट से नहीं, बल्कि सरकार के अचानक लिए गए शटडाउन फैसलों से होता है। दरअसल, दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों जैसे सदर बाजार, चांदनी चौक और करोल बाग के व्यापारियों ने जीएसटी नोटिस और लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी के खिलाफ 2 दिन के सांकेतिक बंद का ऐलान किया था। यह बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से करने की योजना थी।
लेकिन कुछ बड़े व्यापारी संगठनों ने इस बंद का विरोध किया था। उनका कहना था कि त्योहारी सीजन से पहले इस तरह के प्रोटेस्ट से ग्राहकों में गलत संदेश जाएगा और बिक्री पर असर पड़ेगा। उन्होंने दिपके से अपील की थी कि वह प्रोटेस्ट को टाल दे। इस आपत्ति के बाद दिपके के अध्यक्ष विजय गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, "कुछ व्यापारी भाई कह रहे हैं कि प्रोटेस्ट से व्यापार को नुकसान होगा। मैं उनसे पूछना चाहता हूं, क्या पिछले साल सरकार ने बिना नोटिस के जो 15 दिन का मार्केट शटडाउन करवाया था, उससे नुकसान नहीं हुआ था? क्या सीलिंग की कार्रवाई से नुकसान नहीं हुआ?" उन्होंने आगे कहा, "शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट से नहीं, सरकारी शटडाउन से व्यापारियों की कमर टूटती है।
हम सड़क पर बैठकर सिर्फ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं। हम कोई तोड़फोड़ नहीं कर रहे। हमारा प्रोटेस्ट पूरी तरह से गांधीवादी तरीके से होगा।" दिपके के मुताबिक, दिल्ली के करीब 7 लाख छोटे और मझोले व्यापारियों को नई पॉलिसी से सीधा नुकसान हो रहा है। एक तो पहले से ही ऑनलाइन शॉपिंग से व्यापार कम हुआ है, ऊपर से हर महीने नए नियम और फीस बढ़ोतरी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। संगठन का दावा है कि लाइसेंस रिन्यूअल फीस में 40% तक की बढ़ोतरी की गई है और जीएसटी के नाम पर छोटे व्यापारियों को बड़े-बड़े नोटिस भेजे जा रहे हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि उन्हें 5-5 साल पुराने मामलों में नोटिस आ रहे हैं।
दिपके ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें रखी हैं: जीएसटी नोटिस पर 6 महीने की रोक लगे और एक सरल समाधान योजना लाई जाए। लाइसेंस फीस में की गई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए। व्यापारियों के लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाए ताकि उन्हें अलग-अलग विभागों के चक्कर न काटने पड़ें। विजय गोयल ने साफ किया कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो यह शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में बदल सकता है। उन्होंने सभी बाजार एसोसिएशनों से एकजुट होने की अपील भी की है। फिलहाल इस बयान के बाद व्यापारी दो गुटों में बंटते नजर आ रहे हैं। देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।
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