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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:48 · नई दिल्ली संस्करण

मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेन ठाकुर को उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से किया सम्मानित

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेन ठाकुर को उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से किया सम्मानित

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखंड भाषा संस्थान के उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह 2025 में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया।मुख्यमंत्री ने डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय तथा अताए साबिर अफजल मंगलौरी को “उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट साहित्यकारों एवं “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं को भी सम्मानित किया।मुख्यमंत्री ने साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला, उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार के लिए डॉ भूपेंद्र बिष्ट, डॉ सुधा जुगरान, शीशपाल गुसाई, उत्कृष्ट कुमाऊ़नी और गढ़वाली साहित्य में तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल आदि को सम्मानित किया।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्हें प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।धामी ने कहा कि उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह प्रदेश की साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक चेतना और साहित्यकारों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है, जहां हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने अनेक लेखकों और कवियों को प्रेरित किया है। सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत “शिवानी”, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों ने इस धरा को गौरवान्वित किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक केवल शब्दों के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी प्रदान कर रही है।मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं, जहां साहित्यकारों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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