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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:16 · नई दिल्ली संस्करण

जींद : पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने कैबिनेट मंत्री को सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
जींद : पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने कैबिनेट मंत्री को सौंपा ज्ञापन

जींद। पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ईकाई नरवाना द्वारा सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (ओपी) की बहाली को लेकर शनिवार को कैबिनेट मंत्री व नरवाना विधायक कृष्ण बेदी को ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान मोहनलाल ने की। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि पुरानी पेंशन कोई कृपा या रियायत नही बल्कि कर्मचारी का संवैधानिक, नैतिक और सामाजिक अधिकार है। जिसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। समिति ने चेताया कि ओपी को खत्म कर लागू की गई एनपीएस और प्रस्तावित यूपीएस योजनाएं कर्मचारियों के भविष्य के साथ किया गया सबसे बडा अन्यायपूर्ण, अस्थिर और बाजार-आधारित प्रयोग है। जिसका दंश आज लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी झेल रहे हैं। प्रदेश महासचिव रिषी नैन व प्रदेश में वरिष्ठ उप प्रधान अनूप लाठर ने कहा कि ओपीएस ही एकमात्र ऐसी व्यवस्था है, जो कर्मचारी को अंतिम वेतन के आधार पर आजीवन सुनिश्चित पेंशन, महंगाई राहत तथा पारिवारिक पेंशन प्रदान करती है।यही योजना कर्मचारी को मानसिक सुरक्षा और सम्मान देती है, जिससे वह बिना भय के शासन-प्रशासन की नीतियों को ईमानदारी से लागू करता है। इसके विपरीत एनपीएस और यूपीएस में न तो पेंशन की गारंटी है और न ही बुढापे की कोई सुनिश्चित सुरक्षा। समिति ने कहा कि शेयर बाजार पर आधारित पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों की जीवनभर की कमाई को जोखिम में डालती है। सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली सीमित और अनिश्चित राशि बुढापे में इलाज, दवाइयों और दैनिक जीवन यापन के लिए भी अपर्याप्त साबित हो रही है।यह व्यवस्था केवल कर्मचारी ही नही बल्कि उसके पूरे परिवार के भविष्य पर सीधा हमला है। कैबिनेट मंत्री व नरवाना विधायक कृष्ण बेदी ने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि आगामी विधानसभा के बजट सत्र में पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को प्रभावी और मजबूती से सरकार के समक्ष रखा जाएगा तथा कर्मचारियों की आवाज को उचित मंच पर पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेताया कि यदि बजट सत्र में ओपीएस बहाली को लेकर सरकार ने कोई ठोस, स्पष्ट और नीतिगत निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी वर्ग इसे सरकार की संवेदनहीनता मानेगा और आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर और अधिक उग्र व व्यापक किया जाएगा।

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