CM योगी को बचाना है अपना दुर्ग, गोरखपुर से बरेली तक बीजेपी की साख दांव पर
सीएम योगी आदित्यनाथ अपना दुर्ग बचाने खुद मैदान में उतर गए हैं। गोरखपुर से बरेली तक बीजेपी की साख दांव पर है। गोरखपुर में विपक्ष ने सेंध लगाने की तैयारी की है, तो बरेली में मुस्लिम-दलित समीकरण से बीजेपी को घेरा जा रहा है। योगी ने 72 घंटे में 4 रैलियां कीं। गोरखपुर में विकास और बरेली में कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। 2027 से पहले ये लड़ाई योगी के लिए प्रतिष्ठा की बन गई है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। गोरखपुर से लेकर बरेली तक बीजेपी की साख दांव पर लगी है और खुद सीएम योगी को मोर्चा संभालना पड़ा है। गोरखपुर तो योगी का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार हालात पहले जैसे नहीं हैं। विपक्ष ने इसी दुर्ग में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन लगातार गोरखपुर में जनसभाएं कर रहा है, वहीं बरेली में मुस्लिम-दलित समीकरण के जरिए बीजेपी को घेरने की रणनीति बनाई गई है।
दरअसल, पिछले कुछ उपचुनावों और निकाय चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। बरेली में पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। इस बार बरेली में कानून-व्यवस्था और मौलाना तौकीर रजा के बयानों ने माहौल गरमा दिया है। योगी के लिए बरेली जीतना सिर्फ एक सीट जीतना नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करना है। सीएम योगी ने पिछले 72 घंटों में गोरखपुर और बरेली में 4 बड़ी जनसभाएं की हैं। गोरखपुर में उन्होंने मंच से कहा, "ये गोरखपुर है, यहां विकास और सुरक्षा दोनों है। जो लोग दंगा कराना चाहते थे, आज वो खुद बेनकाब हो गए हैं।" योगी ने गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर कॉरिडोर, खाद कारखाना और एम्स का जिक्र कर विकास का कार्ड खेला।
वहीं बरेली में उनका तेवर बिल्कुल अलग था। बरेली को उन्होंने 'नाथ नगरी' बताया और कहा कि बरेली को दंगे की आग में झोंकने नहीं देंगे। उनका इशारा सीधे तौर पर सपा और उसकी सहयोगी पार्टियों की तरफ था। योगी ने कहा, "बरेली में पहले आए दिन कर्फ्यू लगता था, आज यहां कांवड़ यात्रा निकलती है। ये फर्क साफ है।" राजनीतिक जानकारों की मानें तो योगी के लिए ये लड़ाई प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। गोरखपुर अगर योगी का मठ है, तो बरेली बीजेपी का प्रयोगशाला। बरेली में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपना हिंदू वोट बैंक पक्का करना चाहती है।
भाजपा के अंदर भी हलचल तेज है। स्थानीय नेताओं की गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। गोरखपुर में सांसद रवि किशन और विधायकों के बीच खींचतान की खबरें हैं, तो बरेली में संतोष गंगवार और नए चेहरे के बीच टिकट को लेकर घमासान मचा है। ऐसे में योगी को खुद उतरकर सबको एकजुट करना पड़ रहा है। विपक्ष भी इस मौके को भुनाने में लगा है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा है कि "जो अपने गढ़ में ही घिर जाए, वो पूरे प्रदेश में क्या लड़ेगा।" फिलहाल, योगी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अगले एक हफ्ते में गोरखपुर और बरेली में योगी की 6 और रैलियां प्रस्तावित हैं। अब देखना होगा कि योगी अपना दुर्ग बचा पाते हैं या फिर विपक्ष इस दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब होता है।




