योगी जी से दूरी पर छलका बालियान का दर्द, कहा- यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी...

पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ अपने रिश्तों में आई दूरी पर खुलकर बात की है। एक इंटरव्यू में जब उनसे योगी जी के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मशहूर शायराना अंदाज में जवाब दिया - 'यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी... 'बालियान ने कहा कि सच तो यह है कि योगी जी के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से 2017 तक लोकसभा में उनकी और योगी आदित्यनाथ की सीटें आगे-पीछे थीं। दोनों रोज संसद में मिलते थे, साथ बैठते थे और घंटों चर्चा करते थे। उस दौरान एक गहरी दोस्ती थी।
उन्होंने एक किस्सा भी साझा किया। बालियान ने बताया कि साल 2015 में जब वह केंद्र में मंत्री थे और योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के सांसद थे, तब योगी जी ने उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था। वह गोरखपुर गए थे, गोरखनाथ मठ के एक कॉलेज में छात्रों के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बालियान ने कहा, "जब योगी आदित्यनाथ 2017 में मुख्यमंत्री बने तो हमें बहुत खुशी हुई, क्योंकि हम सांसद के रूप में एक साथ बैठते थे।" लेकिन सीएम बनने के बाद रिश्तों में दूरी क्यों आई? इस सवाल पर बालियान ने बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा, "योगी आदित्यनाथ जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और पिछले साढ़े आठ-नौ सालों में वे देश में बहुत बड़े नेता बनकर उभरे हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है, इसलिए उनके साथ मेरी तुलना ठीक नहीं है। योगी जी बहुत बड़े नेता हैं और वे उनके सामने कुछ भी नहीं हैं।" उन्होंने स्वीकार किया कि हां, पहले जितना आना-जाना था, वह अब नहीं रहा। सीएम आवास पर पहले की तरह मिलना-जुलना कम हो गया है। लेकिन इसके पीछे क्या वजह है, इस पर उन्होंने वही शेर दोहरा दिया। इसी बातचीत में संजीव बालियान ने यूपी के चर्चित बुलडोजर मॉडल पर अपनी ही सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग सुर अलापा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें बुलडोजर का महिमामंडन कभी रास नहीं आया। बालियान ने कहा, "कानून अपना काम करे, वह ठीक है, लेकिन बुलडोजर के जरिए शक्ति प्रदर्शन करना और इसे ब्रांड बनाना उन्हें कभी पसंद नहीं रहा।
बुलडोजर बाबा सुनने में भले ही ठीक लगता हो, लेकिन यह योगी जी तय करेंगे, मैं तय करने वाला कौन होता हूं।" उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय होती है और यह उनकी निजी राय है। बालियान ने 2024 लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर से अपनी हार पर भी बात की। उन्होंने माना कि हार की कोई एक वजह नहीं थी। संगीत सोम के साथ हुए विवाद और ठाकुर समाज की पंचायतों के कारण हुए नुकसान ने भी असर डाला। उन्होंने माना कि आपसी मतभेद सार्वजनिक नहीं होने चाहिए थे। उन्होंने साफ किया कि उनका फिलहाल 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई मन नहीं है। साथ ही पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की अपनी पुरानी मांग को भी उन्होंने दोहराया।
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