World Bank ने भारत के मजदूर वर्ग की मदद के लिए 3,717 करोड़ रुपये के ऋण कार्यक्रम को दी मंजूरी
500 मिलियन अमरीकी डालर में से 112.50 मिलियन अमरीकी डालर विश्व बैंक की रियायती ऋण देने वाली शाखा इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा दिये जाएंगे और 387.50 मिलियन अमरीकी डालर पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (IBRD) द्वारा लोन के रूप में दिये जाएंगे।
नई दिल्ली : विश्व बैंक (World Bank) ने बुधवार को बताया कि उसने मौजूदा महामारी संकट से उबरने में भारत के अनौपचारिक मजदूर वर्ग का समर्थन करने के लिए 500 मिलियन अमरीकी डालर (लगभग 3,717.28 करोड़ रुपये) के ऋण कार्यक्रम को मंजूरी दी है। विश्व बैंक ने एक बयान में कहा कि यह ऋण राज्यों को मौजूदा महामारी व भविष्य के जलवायु और आपदा के संकटों से निपटने में मदद प्रदान करेगा।
500 मिलियन अमरीकी डालर में से 112.50 मिलियन अमरीकी डालर विश्व बैंक की रियायती ऋण देने वाली शाखा इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा दिये जाएंगे और 387.50 मिलियन अमरीकी डालर पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (IBRD) द्वारा लोन के रूप में दिये जाएंगे।
ऋण की मैच्योरिटी अवधि 18.5 वर्ष है, जिसमें पांच वर्ष की छूट अवधि शामिल है। विश्व बैंक ने बताया कि महामारी की शुरुआत के बाद से गरीब और कमजोर परिवारों की मदद के लिए भारत के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में उसके द्वारा जी जा रही कुल धनराशि 1.65 बिलियन अमरीकी डालर (लगभग 12,264.54 करोड़ रुपये) है।
विश्व बैंक ने कहा कि पिछले साल स्वीकृत दो कार्यों के तहत पहले से मौजूद राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से लगभग 320 मिलियन व्यक्तिगत बैंक खातों में तत्काल आपातकालीन राहत नकद हस्तांतरण प्रदान किया गया और लगभग 800 मिलियन (80 करोड़) व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त राशन प्रदान किया गया।
विश्व बैंक ने कहा कि राज्य अब आपदा प्रतिक्रिया निधि से उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा प्रतिक्रियाओं को डिजाइन और कार्यान्वित करने के लिए लचीली निधि प्राप्त कर सकते हैं। इस फंड का उपयोग शहरी अनौपचारिक श्रमिकों, गिग-वर्कर्स और प्रवासियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम में किया जाएगा।





