रामगढ़ के गोला प्रखंड में वरदान, बीएम सेवा सदन और आदिती नर्सिंग होम का निरीक्षण
रामगढ़,। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत शुक्रवार को राज्य
एवं जिला स्तरीय टीम ने गोला क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों का औचक निरीक्षण
किया। टीम का नेतृत्व क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के राज्य कॉर्डिनेटर
डॉ राहुल कुमार सिंह कर रहे थे। उनके साथ डॉ सत्यप्रकाश, रश्मि आनंद एवं
शाहिद थे। टीम ने वरदान अस्पताल, आदिती नर्सिंग होम एवं बीएम सेवा सदन का
निरीक्षण किया।
बीएम सेवा सदन में नहीं मिला कोई चिकित्सक
बीएम
सेवा सदन में निरीक्षण के दौरान कोई भी डॉक्टर नहीं मिला लेकिन वहां मरीज
इलाज करने के लिए इंतजार कर रहे थे। पूछने पर बताया गया कि वह डॉक्टर
अनामिका को दिखाने के लिए आए हैं लेकिन डॉक्टर अनामिका का अस्पताल में कोई
नाम तक नहीं पाया गया। इससे पता चलता है कि इस नाम के बिना योग्य कर्मी के
द्वारा चिकित्सा परामर्श दिया जा रहा है। फार्मेसी में कोई भी फार्मासिस्ट
नहीं पाया गया और जो वह उपलब्ध कर्मी थे वे कही सब अयोग्य थे।
बीएम सेवा सदन में मिली भारी गड़बड़ी, टीम हुई नाराज
अस्पताल
में बायोमेडिकल वेस्ट का कचरा बहुत दोनों से सीढ़ी के कोने में रखा हुआ
था, जो कि नियमों का घोर उल्लघन है। फायर सेफ्टी से संबंधित किसी भी तरह की
कोई व्यवस्था नहीं मिली। अस्पताल में 45 साल की महिला की बच्चेदानी का
ऑपरेशन किस चिकित्सक ने किया इसका प्रणाम नहीं मिला। बिना महिला चिकित्सक
के मंतव्य की बिना ऑपरेशन कर देना घोर लापरवाही दर्शाता है।
अदिति नर्सिंग होम में भी नियमों की अनदेखी
अदिति
नर्सिंग होम की स्थिति तो और भी दयनीय पाई गई। ये अस्पताल बिना किसी मानक
के चलता है। इनके संचालक खुद के नाम के साथ के आगे डॉक्टर लगाते हैं। पूछने
पर पता चला के ये एक फार्मासिस्ट है। इनके अस्पताल में सिर्फ दो कर्मी
काम करते है। ओटी रूम में गंदगी का अंबार पाया गया। ढेर सारी दवाइयां भी
बिना बिल का पाया गाया। कोई ड्रग्स का लाइसेंस भी अस्पताल में नहीं उपलब्ध
था।
पुराने इलाज के रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि मरीजों का इलाज
इन्हीं के द्वारा किया जाता है। फायर सेफ्टी बीएमडब्लू से संबंधित किसी भी
तरह का कागज उपलब्ध करने में समर्थ रहे। ये अस्पताल बहुत ऐसे भवन में चलाया
जा रहा था जो किसी भी तरह से मानक को पूर्ण नहीं कर सकता। अस्पताल के
स्थिति देख टीम ने डॉ केके सिंह को अस्पताल बंद करने की सलाह दे डाली।
बढ़ती गई जांच, लंबी होती गई गड़बड़ियों की लकीर
वरदान
अस्पताल में तो और भी गड़बड़ियां पाई गई। अस्पताल मकान में संचालित हो रहा
था और इसमें लिखा गया अधिकतर चिकिसक सरकारी सेवा में है। निरीक्षण के क्रम
में पाया गया कि जिस महिला मरीज को सीएचसी गोला से रेफर किया गया था वही
सरकारी अस्पताल की चिकित्सक डॉ अपराजिता के द्वारा वरदान में उसी मरीज
ऑपरेशन किया गया। साफ दिखता है कि वरदान अस्पताल सरकारी अस्पताल के मरीजों
को अपने यहां साठ-गांठ से खुले आम इलाज करता है।
अस्पताल में यह
भी पाया गया कि ड्यूटी डॉक्टर एलके शर्मा, जिनके पास आयुर्वेद बीएएमएस की
डिग्री है लेकिन पूछताछ पर पता चला कि उनके पास भी किसी भी तरह का एलोपैथी
प्रैक्टिस करने का कोई डिग्री नहीं है। अस्पताल में गंदगी की भरमार पाई गई।
सीढ़ी मे भी को रेलिंग नहीं होना मरीज को हादसे को बुलाना जैसा है।
अस्पताल में बीएमडब्ल्यू से संबंधित किसी तरह का मानक पूर्ण नहीं किया जा
रहा। वरदान अस्पताल के पर्सन इन चार्ज भी एक सरकारी चिकित्सक है।





