मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:54 · नई दिल्ली संस्करण

एलएसी पर चीन के कदम वापस लेने के क्या हैं मायने, भारत की रणनीति कैसे हुई कारगर साबित

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन

नई दिल्ली : एलएसी के पास चालबाज चीन जब मकड़जाल बुन रहा था, तब भारत के शूरवीरों ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं में तनाव पैदा हो गया। दोनों ही देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई वार्ताएं हुईं, लेकिन बात नहीं बनी। चीन यह भ्रम में रहा कि भारत दबाव में आ जाएगा और अपने पैर पीछे हटा लेगा। इधर, भारत ने सैनिकों को सीमा पर मुंहतोड़ जवाब देने की छूट दे दी और चीन की नापाक हरकतों को लगातार दुनिया के सामने रखा। नतीजतन 24 जनवरी को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की बैठक में चीन फिंगर चार से आठ तक की जगह को खाली करने पर राजी हो गया। भारतीय सेना भी फिंगर तीन पर लौटेगी। हालांकि, सीमा विवाद को पूरी तरह खत्म करने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन इसे भारतीय रणनीति की कामयाबी का पहला चरण माना जाएगा। आइए जानते हैं कि चीन के कदम वापस लेने के क्या मायने हैं और भारत की रणनीति कैसे कारगर साबित हो रही है..

यह इलाका क्यों अहम है?

पैंगोंग झील का उत्तरी और दक्षिणी किनारे बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं। खासकर पिछले साल मई में भारत व चीन के सैनिकों के आमने-सामने होने के बाद यह क्षेत्र ज्यादा अहम हो गया है। जब एलएसी का अतिक्रमण करते हुए चीनी सैनिक भारतीय सीमा में आठ किलोमीटर भीतर आ घुसे थे तब हमारे सैनिकों ने उनका प्रतिरोध किया था। दोनों देशों के सैनिकों में संघर्ष हुआ। चीन ने फिंगर चार व तीन पर सैनिकों की तैनाती कर दी थी, जबकि भारत का कहना है कि एलएसी की सीमा फिंगर आठ तक है। पैंगोंग झील के आसपास की चोटियों को फिंगर कहा जाता है।

सैनिकों को मिली थी बड़ी कामयाबी

पिछले साल अक्टूबर के आखिर में भारतीय सैनिकों को उल्लेखनीय रणनीतिक सफलता मिली और उन्होंने चीनी सेना को पीछे धकेलते हुए कुछ और चोटियों को अपने कब्जे में कर लिया। इनमें मगर हिल, मुखपरि, गुरुंग हिल, रेजांग ला और रेचिन ला शामिल हैं। इन पर पहले दोनों पक्षों का कब्जा था।

भारतीय सैनिकों द्वारा पांच से ज्यादा चोटियों पर कब्जा करने के बाद चीन सकते में आ गया। इन चोटियों पर कब्जे की वजह से भारत को न सिर्फ स्पांगुर गैप में बढ़त मिल रही थी, बल्कि हम चीन के मोल्डो गैरिसन पर नजर भी रख सकते थे। स्पांगुर गैप दो किलोमीटर चौड़ी घाटी है, जिसके जरिये चीन ने वर्ष 1962 में हमला किया था। इसके अलावा भारत झील के उत्तरी किनारे पर भी चीन को दरकिनार करते हुए ऊंचाई पर अपने सैनिकों की दोबारा तैनाती कर सकता था। बता दें कि इन इलाकों में बहुत करीब तैनाती के कारण दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई बार झड़पें हो चुकी हैं।

चीन सितंबर 2020 से ही भारत पर पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे और चुशूल सब-सेक्टर से सैनिकों की वापसी के लिए दबाव बना रहा था। हालांकि, भारत इस बात पर अडिग था कि डिसइंगेजमेंट यानी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया सभी क्षेत्र से शुरू होनी चाहिए और सेनाओं की अप्रैल 2020 की स्थिति में वापसी होनी चाहिए। हालांकि, दोनों पक्ष अभी पैंगोंग झील इलाके से अपनी सेनाओं को पीछे करने पर सहमत हुए हैं।

क्या खत्म हो गई तनातनी?

पैंगोंग झील का इलाका तो टकराव का महज एक क्षेत्र है, पिछले साल चीनी सेनाओं ने चार अन्य इलाकों में भी एलएसी का अतिक्रमण किया था। इनमें गोगरा पोस्ट का पैट्रोलिंग प्वाइंट 17ए (पीपी17ए) और पीपी15 के करीब हॉट स्पि्रंग इलाका शामिल हैं। दोनों एक दूसरे के बिल्कुल करीब हैं। तीसरा है- गलवन घाटी का पीपी14 जहां पिछले साल भारतीय व चीनी सैनिकों में संघर्ष हो गया था। इसमें 20 भारतीय और दर्जनों चीनी सैनिक मारे गए थे। चौथा है डेप्सांग प्लेंस जो उत्तर में स्थित कोराकोरम दर्रे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दौलत बेग ओल्डी के करीब है। इन क्षेत्रों में रोजाना होने वाली चीनी पैट्रोलिंग ने भारतीय सैनिकों की पैट्रोलिंग में व्यवधान डालना शुरू कर दिया था। ये पैट्रोलिंग प्वाइंट एलएसी के भीतर रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें