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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:10 · नई दिल्ली संस्करण

हिसार : सांस्कृतिक विरासत, एकता और देश के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है ‘वंदे मातरम्’

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हिसार : सांस्कृतिक विरासत, एकता और देश के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है ‘वंदे मातरम्’

हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज के मार्गदर्शन में सभी महाविद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने शुक्रवार काे कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गीत हमें हमारी सांस्कृतिक विरासत, एकता और देश के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है। यह गीत हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। यह हमें सिखाता है कि देशभक्ति केवल नारों में नहीं बल्कि देश के लिए किए गए कार्यों और बलिदानों में निहित है। ‘वंदे मातरम्’ का प्रभाव साहित्य, संगीत के अलावा कला में भी है। यह गीत आज भी शिक्षण संस्थाओं,सांस्कृतिक समारोहों और राष्ट्रीय आयोजनों में गाया जाता है, जो इसकी अमरता का प्रमाण है।बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत के माध्यम से भारत माता की छवि को ऐसे उकेरा कि यह प्रत्येक भारतीय के हृदय में बस गया। वंदे मातरम भारतीयता का प्रतीकात्मक संवाद है। यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और स्वाधीनता की भावना का जीवंत प्रतीक है। यह गीत भारत माता को मां के रूप में चित्रित करता है, जो अपनी संतानों को प्रेम, शक्ति व बलिदान की प्रेरणा देती हैं।यह गीत हमें सिखाता है की स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक अवस्था नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक बंधन है जो हमें अपनी मातृभूमि से जोड़ता है। यह गीत 1875 में लिखा गया। इस गीत की भाषा में संस्कृत की शास्त्रीयता और बंग्ला की मधुरता का अनूठा संगम है। ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का नारा बन गया जिसने लाखों भारतीयों को एकजुट किया। ‘वंदे मातरम्’ का हर शब्द हमें भारत माता के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण की प्रेरणा देता है।

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