रेल मंत्री का बड़ा ऐलान: देश में हिट हुई तो विदेश में भी सुपरहिट होगी वंदे भारत, जर्मनी-US ने दिखाया इंटरेस्ट
भारत की वंदे भारत एक्सप्रेस अब विदेशों में भी दौड़ेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कुछ सालों में वंदे भारत का एक्सपोर्ट शुरू होगा। फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। यह ट्रेन 100% मेड इन इंडिया है और यूरोपीय ट्रेनों से 40-50% सस्ती है। फिलहाल ICF चेन्नई, लातूर और सोनीपत में इसका उत्पादन तेज है। एक्सपोर्ट से भारत ग्लोबल रेल मार्केट में बड़ा प्लेयर बन जाएगा।

नई दिल्ली। भारत में सफलता के परचम लहराने के बाद अब वंदे भारत एक्सप्रेस विदेशों की पटरियों पर भी दौड़ने को तैयार है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि कुछ सालों के अंदर भारत वंदे भारत ट्रेनों का एक्सपोर्ट शुरू कर देगा। फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसे विकसित देशों ने भी इस स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन में दिलचस्पी दिखाई है। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वंदे भारत अब सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग ताकत का प्रतीक बन गई है। उन्होंने बताया कि पहले हम ट्रेन के कोच और तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर थे, लेकिन आज स्थिति बदल गई है।
वंदे भारत 100 प्रतिशत भारत में डिजाइन और निर्मित है। इसकी गति, सुरक्षा और आराम विश्वस्तरीय है। यही कारण है कि कई देश इसे अपने यहां चलाने पर विचार कर रहे हैं। मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे ने वंदे भारत के प्रोडक्शन को बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के साथ-साथ अब लातूर और सोनीपत में भी इसके कोच बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर साल 200 से ज्यादा वंदे भारत रैक तैयार की जाएं। जब घरेलू मांग पूरी हो जाएगी, तो एक्सपोर्ट पर फोकस किया जाएगा। उन्होंने कहा, "अगले 3 से 4 साल में हम वंदे भारत को एक्सपोर्ट करने की स्थिति में होंगे।" फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका में वंदे भारत क्यों हिट हो सकती है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोप और अमेरिका में इंटर-सिटी यात्रा के लिए सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वंदे भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम लागत है। यूरोप में बनी इसी कैटेगरी की ट्रेनों की तुलना में वंदे भारत 40-50% सस्ती है। इसके बावजूद इसमें यूरोपीय मानकों जैसी सुविधाएं हैं, जैसे ऑटोमैटिक दरवाजे, जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली, बायो वैक्यूम टॉयलेट, 180 डिग्री घूमने वाली कुर्सियां और कवच सुरक्षा प्रणाली। इसके अलावा वंदे भारत की स्पीड भी इसकी यूएसपी है। यह 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है और 0 से 100 की स्पीड सिर्फ 52 सेकेंड में पकड़ लेती है। ऊर्जा की खपत भी कम है। यही वजह है कि ब्राजील, चिली, इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी भारत से संपर्क किया है।
भारत पहले ही वंदे भारत के कई वर्जन लॉन्च कर चुका है। वंदे भारत एक्सप्रेस के बाद वंदे भारत स्लीपर और वंदे मेट्रो भी ट्रायल में हैं। एक्सपोर्ट के लिए वंदे भारत को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से कस्टमाइज किया जाएगा, जैसे यूरोप की ठंड के हिसाब से हीटिंग सिस्टम। अगर यह योजना सफल होती है, तो यह पहली बार होगा जब भारत कोई स्वदेशी ट्रेन विकसित देश को बेचेगा। इससे रेलवे को हजारों करोड़ की आय होगी और भारत ग्लोबल रेल मार्केट में एक बड़ा प्लेयर बनकर उभरेगा।
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