UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर: मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने से फिनटेक और बैंकिंग सेक्टर की होगी बंपर कमाई, जानें पूरी डिटेल

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर छह साल बाद एक बार फिर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने से डिजिटल भुगतान और बैंकिंग उद्योग की आय में 15,000 से 20,600 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है। यह अनुमान ब्रोकरेज कंपनियों ने लगाया है। एमडीआर वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए दुकानदारों से लिया जाता है। एमडीआर 2,000 रुपए से ज्यादा के पीयर-टु-मर्चेंट (पी2एम) यानी ग्राहक से कारोबारी को किए जाने वाले यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा।
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक 26 अगस्त के लेनदेन स्तर को आधार मानें तो कुल यूपीआई पी2एम लेनदेन मूल्य का करीब 48 फीसदी हिस्सा एमडीआर के दायरे में आता है। इससे उद्योग के लिए करीब 20,600 करोड़ रुपए की आय का मौका है। सिटी ने सालाना 16 से 17 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय का अनुमान लगाया है। वहीं, जेफरीज ने उद्योग के लिए 15 से 18 हजार करोड़ रुपए की आय का होने की संभावना जताई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एमडीआर से होने वाली आय यूपीआई व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच बांटी जाएगी। इनमें पीएसपी बैंक, यूपीआई ऐप प्रदाता के साथ वे दोनों बैंक शामिल हैं जिनसे रकम निकलेगी और जिनमें रकम पहुंचेगी।
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक कुल आय में से 50 फीसदी हिस्सा भुगतान जारी करने वाले बैंकों और पीएसपी को, 20 फीसदी थर्ड पार्टी ऐप प्रदाता को और 30 फीसदी भुगतान लेने वाले बैंकों को मिलेगा। सिटी के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त आय का करीब 60 फीसदी हिस्सा जारी करने वाले और लेने वाले बैंकों या यूपीआई हैंडल के जरिये बैंकिंग क्षेत्र को मिलेगा। करीब 25 फीसदी आय यूपीआई ऐप प्रदाताओं और बाकी 15 फीसदी गैर-बैंक पेमेंट एग्रीगेटरों को मिलने की संभावना है। निजी क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ बैंकर ने कहा कि जिन बैंकों के साथ अपेक्षाकृत अधिक राशि के लेनदेन करने वाले कारोबारी जुड़े हैं, उन्हें फायदा हो सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कारोबारी को लेनदेन की कुल रकम का अधिकतम 0.40 फीसदी एमडीआर के रूप में देना होगा। इस शुल्क को यूपीआई से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच बांटा जाएगा। मसलन अगर यूपीआई से 10,000 रुपए का लेनदेन होता है तो कारोबारी को 40 रुपए एमडीआर देना होगा। इसमें से भुगतान स्वीकार करने वाले बैंक को 40 रुपए मिलेंगे। वह इसमें से 28 रुपए भुगतान जारी करने वाले बैंक को देगा और उसके पास 12 रुपए बचेंगे। भुगतान जारी करने वाले बैंक को मिले 28 रुपए में से वह 12 रुपये भुगतानकर्ता के पीएसपी को देगा। इस तरह उसके पास 16 रुपए बचेंगे। पीएसपी को मिले 12 रुपए में से वह 8 रुपए यूपीआई ऐप प्रदाता को देगा और उसके पास 4 रुपए बचेंगे।
इस तरह 40 रुपए के कुल एमडीआर में से भुगतान लेने वाले बैंक को 12 रुपए, देने वाले बैंक को 16 रुपए, भुगतानकर्ता के पीएसपी को 4 रुपए और ऐप प्रदाता को 8 रुपए मिलेंगे। यूपीआई व्यवस्था में एसबीआई सबसे बड़ा भुगतान जारी करने वाला बैंक है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक और अन्य बैंक हैं। वहीं, यूपीआई के भुगतानकर्ता-पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (पेयर-पीएसपी) क्षेत्र में एक्सिस बैंक की बाजार हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है। लेनदेन की संख्या के आधार पर यह उसे इस क्षेत्र में प्रमुख बैंक बनाती है।
भारत में कारोबारियों से भुगतान स्वीकार करने की सेवा कारोबार में भी एक्सिस बैंक बड़े खिलाड़ियों में शामिल है। इस क्षेत्र में उसकी बाजार हिस्सेदारी 22.1 फीसदी है। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी सिटी ने कहा कि यूपीआई पर एमडीआर लागू होने से सूचीबद्ध फिनटेक कंपनियों जैसे पेटीएम और पाइन लैब्स की आय बढ़ सकती है। यूपीआई ऐप और मर्चेंट अधिग्रहण कारोबार में पेटीएम की मौजूदा बाजार हिस्सेदारी को देखते हुए एमडीआर से उसे क्रमशः 300 करोड़ रुपए और 600-700 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है। पाइन लैब्स को यूपीआई पर एमडीआर लागू होने से वित्त वर्ष 2027-28 में करीब 180 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि एमडीआर लागू होने से आईपीओ की तैयारी कर रही फिनटेक कंपनियों जैसे फोनपे और रेजरपे के मूल्यांकन में बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह इन कंपनियों की आय में संभावित वृद्धि है। संस्थापकों और उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि यूपीआई से एमडीआर के जरिये मिलने वाली फीस का एक बड़ा हिस्सा कैशबैक और रिवॉर्ड के रूप में ग्राहकों को वापस दिया जा सकता है। इसका मकसद नए ग्राहक जोड़ना और मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखना होगा।





