UPI पेमेंट पर 'मोदी टैक्स': 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नए नियमों की चर्चा, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

UPI आज चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक भुगतान का सबसे आसान तरीका बन चुका है, लेकिन जिस यूपीआई का इस्तेमाल करोड़ों लोग रोज करते हैं, उसके पीछे काम करने वाली व्यवस्था और इसके नियमों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने विकसित किया है। एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक के नियमन के तहत काम करता है और यूपीआई को तत्काल भुगतान प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है।
बता दें यूपीआई की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसका पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को मुंबई में तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने किया था। शुरुआत में 21 बैंकों को इससे जोड़ा गया था। अगस्त 2016 से कई बैंकों ने यूपीआई आधारित सेवाएं और ऐप उपलब्ध कराने शुरू किए। इसके बाद यूपीआई का दायरा बढ़ता गया और यह देश के डिजिटल भुगतान तंत्र का अहम हिस्सा बन गया। यूपीआई की सबसे बड़ी खासियत इसकी इंटरऑपरेबिलिटी है यानी अलग-अलग बैंकों के खातों को एक ही भुगतान इंटरफेस के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए ग्राहक को हर बार बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड साझा करने की जरूरत नहीं होती। यूपीआई आईडी या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है। यह आमतौर पर नाम, बैंक जैसे प्रारूप में होती है। यूपीआई से भुगतान करते समय ग्राहक अपने बैंक खाते से जुड़ा ऐप खोलकर राशि दर्ज करता है और लेनदेन को यूपीआई पिन के जरिए अधिकृत करता है। इसके बाद भुगतान प्रणाली के जरिए राशि भेजने वाले बैंक खाते से प्राप्तकर्ता के बैंक खाते तक पहुंचती है। यूपीआई पिन चार से छह अंकों का गुप्त पासकोड होता है, जिसे किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
यूपीआई का इस्तेमाल केवल व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान तक सीमित नहीं है। दुकानदारों को भुगतान, क्यूआर कोड, ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान, फीस, दान और अन्य सेवाओं के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मामलों में भुगतान मांगने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। अब यूपीआई एक बार फिर शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। 15 अक्टूबर से बड़े व्यापारियों के कुछ यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की बात सामने आई है। इसका अर्थ व्यापारी के भुगतान लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था में बदलाव है। हालांकि इसका सीधा शुल्क आम ग्राहक से वसूलना अलग विषय है। इसलिए ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यूपीआई भुगतान की मूल प्रक्रिया और व्यापारी से जुड़े शुल्क नियम अलग-अलग बातें हैं।
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्ष के नेता मोदी सरकार पर निशाना साध रही है। राहुल गांधी ने इसे मोदी टैक्स बताते हुए सरकार पर गुस्सा जाहिर किया था और इसे वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस के पांच सांसद के इस ट्रांजैक्शन को सपोर्ट करने की बात कही जा रही है जिसे गौरव गोगोई ने खारिज किया है। संसद की वित्त संबंधी स्यायी समिति की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरुरत पर जोर दिया गया था।
इस लिस्ट में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ शामिल थे। संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने मोदी सरकार के हाल ही में घोषित यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं की है। गोगाई ने कहा कि यूपीआई टैक्स की हालिया नीतियां भारत के छोटे व्यापारियों, वेंडरों और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं। बता दें केंद्र सरकार ने प्रस्तावित 0.4 परसेंट एमडीआर को वापस लेने से इनकार कर दिया है। यह व्यवस्था 2000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगी।





