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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:36 · नई दिल्ली संस्करण

RBI के इस नए वेरिफिकेशन नियम की वजह से सब्जी, चाय वाले से लेकर छोटे दुकानदारों की बढ़ेंगी मुश्किलें

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
RBI के इस नए वेरिफिकेशन नियम की वजह से सब्जी, चाय वाले से लेकर छोटे दुकानदारों की बढ़ेंगी मुश्किलें

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी मर्चेंट्स के लिए 15 सितंबर 2026 तक Re-KYC पूरा करना अनिवार्य किया है। समय पर सत्यापन न होने पर QR कोड निष्क्रिय हो सकते हैं। छोटे दुकानदारों का QR कोड बंद होने से UPI भुगतान नहीं हो पाएगा, जिससे ग्राहकों को नकदी पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

भारत में डिजिटल क्रांति के इस दौर में चाय का ठेला हो, फल-सब्जी की दुकान हो या कोई छोटा किराना स्टोर, हर जगह Paytm, PhonePe और Google Pay के QR कोड से भुगतान करना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक सख्त नियम ने देश के लाखों छोटे कारोबारियों और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक सभी मर्चेंट्स के लिए 15 सितंबर 2026 तक Re-KYC (री-केवाईसी) यानी पुनः सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य है। यदि यह प्रक्रिया समय रहते पूरी नहीं हुई, तो मर्चेंट्स के QR कोड निष्क्रिय (Deactivate) हो सकते हैं।

पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों के अनुसार, देश में अभी भी लाखों छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारियों का री-केवाईसी सत्यापन पेंडिंग है। अनुमान है कि तय समयसीमा तक केवल 80% व्यापारियों का ही वेरिफिकेशन पूरा हो पाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि लगभग 10 लाख छोटे कारोबारी और करीब 30 से 35 प्रतिशत स्ट्रीट वेंडर्स इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। यदि 15 सितंबर तक सत्यापन नहीं होता है, तो इन दुकानदारों का QR कोड काम करना बंद कर देगा, जिससे ग्राहकों के लिए UPI भुगतान करना असंभव हो जाएगा।

इस स्थिति का सबसे बड़ा असर रोजमर्रा की खरीदारी पर पड़ेगा। मान लीजिए आप किसी चाय या सब्जी वाले के पास जाते हैं और वहां QR कोड स्कैन करने पर पेमेंट फेल हो जाता है, तो आपको नकद (Cash) भुगतान ही करना पड़ेगा। हालांकि, इस नियम का असर भारत के पूरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर नहीं पड़ेगा। बड़ी दुकानों, मॉल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के भुगतान सुचारू रूप से चलते रहेंगे, क्योंकि उनका री-केवाईसी पहले ही अपडेट हो चुका होता है।

डिजिटल पेमेंट पर पूरी तरह निर्भर छोटे दुकानदारों की घटती बिक्री को देखते हुए फिनटेक कंपनियों ने RBI से इस डेडलाइन को आगे बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल बाज़ार की नज़रें केंद्रीय बैंक के फैसले पर टिकी हैं। एहतियात के तौर पर, आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे खरीदारी के लिए निकलते समय थोड़ा कैश भी साथ रखें।

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