अनोखी परम्पराः पुरुषों को गांव से भगाने के बाद घूंघट वाली महिलाएं खेलती है होली
अनोखी परम्पराः पुरुषों को गांव से भगाने के बाद घूंघट वाली महिलाएं खेलती है होली-महिलाओं की फाग निकालकर होली खेलने की तैयारियां अब शुरूहमीरपुर, 01 मार्च । हमीरपुर जिले के एक ऐसा गांव जहां सिर्फ घूंघट वाली महिलाएं ही एक दिन होली खेलती है। ये परम्परा कई दशकों से चली आ रही है जिसमें सभी पुरुषों को महिलाओं की होली शुरू होने से पहले गांव छोड़कर खेत और खलिहान जाना पड़ता है। महिलाओं की फाग निकालकर होली खेलने की तैयारियां अब शुरू कर दी गई है।घूंघट वाली महिलाओं की होली बुन्देलखंड के हमीरपुर के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के सिर्फ कुंडौरा गांव में होती है। यह होली बड़े ही अनोखी ढंग से खेली जाती है जिसमें गांव की बुजुर्ग महिलाएं भी धमाल करती हैं। होली के दूज त्योहार के दिन गांव की सभी बुजुर्ग और घूंघट वाली महिलाएं पहले रामजानकी मंदिर में एकत्र होती है। यहां पूजा अर्चना करने के बाद बुजुर्ग महिलाएं फाग गाती है। फिर महिलाएं टोलियां बनाकर गांव की हर गली और धार्मिक स्थानों से होते हुए धमाल करती हैं।महिलाओं की टोलियों का नेतृत्व बुजुर्ग महिलाएं करती हैं। ढोलक और मजीरा बजाते हुए घूंघट की ओट में फाग गाते हुए डांस भी करती हैं। गांव की बुजुर्ग देवरती ने बताया कि पिता का घर छोड़कर ससुराल आने पर उन्हें होली की परम्परा का हिस्सा बन रही है। बताया कि हर साल बड़े ही अनोखे ढंग से मस्ती की होली खेली जाती है। गांव की सरपंच सरिता देवी ने बताया कि देश के किसी भी कोने में ऐसी होली कही नहीं होती है जिसमें पूरे गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से होली खेलती हैं।सरिता देवी ने बताया कि होली त्योहार की खास बात यह है कि महिलाओं की होली और फाग कार्यक्रम शुरू होने से पहले एक भी पुरुष व नौजवान गांव में नही दिखाई देता है। सिर्फ बीमार पुरुषों को ही घरों में रहने की छूट रहती है। गांव के सरपंच के प्रतिनिधि एपी सिंह ने बताया कि सिर्फ एक ही दिन महिलाएं सामूहिक रूप से फाग निकालकर होली पर मस्ती करती है। महिलाओं की फाग और होली के कार्यक्रम से पहले सभी पुरुष गांव से बाहर खेतों की तरफ निकल जाते है। ये लोग तभी वापस गांव लौटते है जब महिलाओं की होली का समापन हो जाता है।ढोलक और मजीरा लेकर महिलाएं पूरे गांव में गाती है होली की फागगांव की सरपंच सरिता देवी ने बताया कि महिलाओं की अनोखी होली का इतिहास काफी पुराना है। गांव की बहुएं भी फाग की धूम में खूब डांस करती है। बताया कि यह कार्यक्रम गांव के रामजानकी मंदिर से प्रारम्भ होता है। ढोलक और मजीरा बजाते हुए बुजुर्ग और घूंघट वाली महिलाएं सामूहिक रूप से फाग निकालती है। गांव की गिरजा और देवरती कुशवाहा ने बताया कि पूरे गांव में महिलाओं की टोलियां फाग निकालने के बाद एक जगह एकत्र होती है। वहां बुजुर्ग और बहुएं फाग की धूम में ठुमके लगाती है। कार्यक्रम भी शाम तक चलता है।होली में ठुमके लगाने की फोटो खींचने पर दी जाती है जुर्माने की सजागांव की सबसे बुजुर्ग महिला देवरती कुशवाहा ने बताया कि इस गांव की होली का रंग बड़ा ही रोमांच भरा होता है जब हर घर की महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होती है। बताया कि महिलाओं की होली की फाग निकलने से पहले ऐलान किया जाता है कि जो भी पुरुष और नौजवान घर में हो वह गांव से बाहर चले जाए। पुरुषों के गांव से बाहर जाने के बाद महिलाओं की होली शुरू होती है। बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि किसी पुरुष ने महिलाओं को ठुमके लगाते देखा तो उसकी खैर नहीं रहती। और तो और फोटो लेने पर भारी जुर्माना बोला जाता है





