अनंगपुर गाँव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर व विधायकों की मुलाकात, जनभावनाओं के सम्मान का दिया आश्वासन

अनंगपुर गाँव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर व विधायकों की मुलाकात, जनभावनाओं के सम्मान का दिया आश्वासन
नई दिल्ली, 16 जुलाई — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित लोक निर्माण विश्रामगृह में फरीदाबाद जिले के अनंगपुर गाँव से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, विधायकगण एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हरियाणा सरकार जनभावनाओं का पूरा सम्मान करती है और राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर के साथ इस प्रतिनिधिमंडल में बल्लभगढ़ से विधायक श्री मूलचंद शर्मा, एनआईटी फरीदाबाद से विधायक श्री सतीश फागना, बड़खल से विधायक श्री धनेश अदलखा एवं अनंगपुर गाँव के प्रमुख नागरिक शामिल थे। सभी प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अनंगपुर गाँव से जुड़ी परिस्थितियों, जनभावनाओं और संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को विस्तार से रखा।
मुख्यमंत्री श्री सैनी ने प्रतिनिधियों की बात को गंभीरतापूर्वक सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और जनभावनाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार इसे किसी प्रशासनिक आदेश मात्र की तरह नहीं देख रही, बल्कि इसमें लोगों की आस्था, जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान को भी महत्व दे रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मुद्दे को राज्य सरकार समन्वय समिति के समक्ष रखेगी, जो माननीय उच्चतम न्यायालय से अनुरोध करेगी कि जनभावनाओं और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। श्री सैनी ने दोहराया कि हरियाणा सरकार संवेदनशील और उत्तरदायी प्रशासन की पक्षधर है और आमजन की आशाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप कदम उठाएगी।
इस मुलाकात को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सकारात्मक बताया और विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री की पहल से अनंगपुर गाँव के निवासियों को राहत मिलेगी तथा उन्हें न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री की यह पहल न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य सरकार जनआकांक्षाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।





