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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:21 · नई दिल्ली संस्करण

विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखंड बनेगा मजबूत आधार: मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखंड बनेगा मजबूत आधार: मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में विकसित उत्तराखंड की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक राज्य को समान रूप से विकसित होना आवश्यक है और उत्तराखंड को अपनी विशिष्ट भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट दिशा तय करनी होगी।मुख्यमंत्री शुक्रवार को सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर एवं डायलॉग ऑन विजन 2047 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' संकल्प के अनुरूप ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे राज्य के समग्र विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तय हो सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का विजन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव-केंद्रित, समावेशी और सतत विकास पर आधारित है। इसमें पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित शासन व्यवस्था की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और अधिकारियों को नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन तक लक्ष्य आधारित और परिणाम केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना होगा।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से 'टीम उत्तराखंड' की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों में वर्ष 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने किसानों की आय वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और महिलाओं के लिए समान अवसर को विकास के प्रमुख मानक बताया। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार तथा जन-केंद्रित सतत विकास के तीन स्तंभों पर आधारित होगी। ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से शासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाएगा, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीक का लाभ दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचे।मुख्यमंत्री ने प्रत्येक योजना के स्पष्ट आउटपुट और आउटकम निर्धारित करने पर जोर देते हुए कहा कि केवल धन व्यय होना ही सफलता का पैमाना नहीं है, बल्कि योजनाओं से आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव आना चाहिए। उद्घाटन सत्र के बाद मुख्यमंत्री काफी देर तक शिविर में उपस्थित रहे और विभिन्न विषयों पर चल रही परिचर्चाओं को सुनते हुए सुझावों को नोट किया।इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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