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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:55 · नई दिल्ली संस्करण

सिख रेजीमेंटल सेंटर में 123वें सारागढ़ी दिवस पर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

रामगढ़। रामगढ़ छावनी में स्थित सिख रेजीमेंटल सेंटर में शनिवार को 123 वां सारागढ़ी दिवस मनाया गया। युद्ध स्मारक पर ब्रिगेडियर एम श्री कुमार, शौर्य चक्र, कमांडेंट सिख रेजीमेंट सेंटर अधिकारियों जेसीओ और जवानों ने सारागढ़ी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सारागढ़ी दिवस पर गुरुद्वारा साहिब में शब्द कीर्तन का भी आयोजन किया गया। बताते चलें कि 12 सितंबर 1897 का यह वीर दिवस हर पीढ़ी को प्रेरित करता है। सिख रेजीमेंटल हर साल 12 सितंबर को सारा गाड़ी की लड़ाई के दिन को रेजिमेंटल बैटल हॉनर डे के रूप में मनाता है। सारागढ़ी का प्रसिद्ध युद्ध 1897 में 4 सिख के 22 सैनिकों द्वारा लड़ा गया था, जो तत्कालीन ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा था। उत्तरी पश्चिमी सीमा प्रांत में हजारों पठानों के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई थी। ब्रिटिश भारतीय सेना उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत के जनजातीय क्षेत्रों पर हावी होने का लक्ष्य बना रही थी। सीमाना एक बहुत ही महत्वपूर्ण जगह थी। फोर्ट लॉकहार्ट और फोर्ट गुलिस्तान नामक दो समान किले इसी रिज लाइन पर थे। लेकिन वह अंतर दृश्य नहीं थे। इसलिए सारागढ़ी के पोस्ट को इन 2 किलों के बीच एक सिगनलिंग पोस्ट के रूप में स्थापित किया गया था। इस पोस्ट का संचालन हवलदार इधर सिंह के नेतृत्व में बहादुर खालसा द्वारा संचालित किया जा रहा था। उस निर्णायक दिन पर अफरीदी और ओरकजाई जनजाती से जुड़े 10,000 से अधिक आदिवासियों ने सारागढ़ी के चौकी पर हमला किया। इधर सिंह के नेतृत्व में सारागढ़ी में उच्च कमान से वापस लेने के आदेश के बावजूद उन्होंने लड़ने का फैसला किया। वीर 22 जवान केवल दुश्मन को भारी हताहत करने में सक्षम थे। बल्कि उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर भी किया। आखरी गोली और आखरी सांस तक लड़ाई लड़ी और सभी 22 सैनिक शहीद हो गए। लेकिन उन्होंने 1 इंच भी जमीन नहीं छोड़ी। सभी योजनाओं को उनके बलिदान के लिए सर्वोच्च वीरता पुरस्कार इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया। जब यह खबर लंदन पहुंची तो ब्रिटिश संसद नियमित कामकाज को स्थगित करते हुए उन बहादुरों को स्टैंडिंग ओवेशन देकर सम्मानित किया। इस महान लड़ाई को यूनेस्को द्वारा दुनिया की 8 सबसे प्रसिद्ध लड़ाईयों में से एक माना गया है। यह लड़ाई सर्वोच्च बलिदान की गाथा है।

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