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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:06 · नई दिल्ली संस्करण

रांची के गेतलसूद डैम में राज्य का पहला फ्लोटिंग पावर प्लांट तैयार, एक माह में होगा उत्पादन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रांची के गेतलसूद डैम में राज्य का पहला फ्लोटिंग पावर प्लांट तैयार, एक माह में होगा उत्पादन

रांची। झारखंड के सबसे पहले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। रांची के गेतलसूद डैम में बन रहे इस 100 मेगावाट क्षमता के प्लांट से मार्च से अप्रैल के बीच बिजली उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

परियोजना के चालू होने के बाद शहर के करीब एक लाख घरों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट का निर्माण जेबीवीएनएल, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के सहयोग से किया जा रहा है। 172 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा यह प्लांट राज्य का पहला बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट होगा।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर परियोजना की प्रगति की जानकारी दी और इसके लोकार्पण का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहमति जताई।

इस प्लांट से हर साल करीब 60 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली का उत्पादन होगा, जिसकी आपूर्ति हटिया और नामकुम ग्रिड को की जाएगी।

जेबीवीएनएल इसके जरिए बिजली लेकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से उत्पादित बिजली की लागत अपेक्षाकृत कम होगी, जिससे सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। परियोजना की खासियत यह है कि सोलर पैनल डैम के पानी की सतह पर तैरते रहेंगे। इससे वाष्पीकरण कम होगा और जल संरक्षण में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही, पानी की ठंडक के कारण पैनलों की कार्यक्षमता जमीन पर लगे सोलर पैनलों की तुलना में बेहतर होगी। यह प्लांट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भूमि उपयोग की आवश्यकता भी नहीं होगी।

राज्य सरकार की सोलर ऊर्जा नीति के तहत आने वाले पांच वर्षों में झारखंड के तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।

इसी क्रम में चांडिल डैम में 600 मेगावाट और तेनुघाट डैम में 400 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित करने की तैयारी चल रही है।

चांडिल परियोजना का सर्वे कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दोनों परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के जरिए न केवल राज्य में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और मछुआरों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।

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