रेस्क्यू कर लाई गई बच्चियांं ने सीएम से कहा, घर नहीं जायेंगे,वहां एक तरफ नक्सली है दूसरे तरफ दलाल है
सीएम ने कहा, घबराने की कोई जरूरत नहीं है आपका भाई राज्य की देख भाल कर रहा है
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को अपने आवास पर मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराकर झारखंड लाई गई बच्चियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं से अवगत हुए। मुख्यमंत्री के पहल से सभी 45 बच्चों को दिल्ली से एयरलिफ्ट करा के झारखंड लाया गया है। ज्यादातर बच्चियों को तस्करों ने तीन चार साल पहले ही सपने दिखाकर झारखंड से दिल्ली ले जाकर बेच दिया था, जहां इनसे दाई का काम कराया जाता था। चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पोनसर योजना के तहत वयस्क होने तक सभी बच्चियों को प्रतिमाह दो हजार रुपये दिया जाएगा। वहीं गोड्डा जिला के संदर पहाड़ी के रहने वाले बालक की पूरी पढ़ाई का खर्च मुख्यमंत्री और सांसद विजय हांसदा उठायेंगे। मौके पर मुख्यमंत्री के पूछने पर बच्चियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि वे अब वापस घर नहीं जाना चाहते हैं। घर जाएंगे तब गरीबी और नक्सली उनका शोषण करेंगे और बाहर रहे तो दलाल। मुख्यमंत्री ने बच्चियों को अश्वस्त करते हुए कहा कि अब आपको डरने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आपका भाई राज्य की देख भाल कर रहा है। आपका पूरा ख्याल रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी उम्र नहीं देखती। गरीब का जीवन जन्म से ही संघर्षशील होता है। इस क्रम में राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवास करने वाले बच्चे व बच्चियां मानव तस्करी का शिकार हो जाते हैं और देश के विभिन्न राज्यों में उन्हें काम पर लगा दिया जाता है। जहां उन्हें अपनी इच्छा के विपरीत कार्य करना पड़ता है। ऐसे में कई संस्थाओं व अन्य माध्यमों से बच्चियों पर नजर रखी जाती है। सरकार समय-समय पर ऐसी बच्चियों को रेस्क्यू भी करती है। इस कड़ी में राज्य की 45 बच्चियों की आज घर वापसी हुई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड की बच्चियां अन्य राज्य जाकर दाई व आया का काम करें, यह पीड़ादायक है। सरकार इसको लेकर चिंतित है। सरकार ने इसपर संज्ञान लिया है। राज्य की बच्चियों को नर्स का प्रशिक्षण प्रदान कर, उन्हें हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा गया। उनके आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त हुआ। वे देश के बड़े अस्पतालों में बतौर नर्स मानव सेवा कर रहीं हैं। सरकार का यह संकल्प है कि मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में कार्य होगा। बच्चियों की इच्छा के अनुरूप सरकार निर्णय लेगी। वयस्क होने तक सभी बच्चियों को प्रतिमाह दो हजार रुपये दिया जाएगा। वयस्क बच्चियों को रोजगार से जोड़ने का कार्य होगा। उनकी जिंदगी का नया सफर प्रारंभ होगा। इस प्रारंभ में सरकार सदैव बच्चियों के साथ है। इस मौके पर सांसद विजय हांसदा, विधायक मथुरा महतो, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, सचिव पूजा सिंघल, डीके सक्सेना व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इनकी रही सरहानीय भूमिका: सीडब्ल्यूसी की चेयर पर्सन रूपा वर्मा ने बताया कि मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को रेस्क्यू कराना एक बहुत बड़ी सफलता है, बता दें कि झारखंड की गरीबी का फायदा उठाकर यहां के भोले-भाले लोगों की धड़ल्ले से ह्यूमन ट्रैफिकिंग होती रही है ज्यादातर मामलों में स्थानीय लोगों की भूमिका सामने आती है। प्रेमाश्रय, चुटिया और दीया सेवा संस्थान, बरियातू रोड में रखा गया है।





