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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

उत्तराखंड विधानसभा में गूंजा महिला आरक्षण का मुद्दा, कांग्रेस विधायक ने 33 प्रतिशत कोटा लागू करने की उठाई मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उत्तराखंड विधानसभा में गूंजा महिला आरक्षण का मुद्दा, कांग्रेस विधायक ने 33 प्रतिशत कोटा लागू करने की उठाई मांग

देहरादून। देहरादून में महिला आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर विधानसभा में सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली, जहां दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

कांग्रेस विधायक मोहम्मद निजामुद्दीन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार से मांग की कि राज्य में 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए।

उनका यह भी कहना था कि बिना नए परिसीमन के, मौजूदा 70 सीटों के आधार पर ही यह व्यवस्था लागू की जा सकती है।"

कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल केवल एक राजनीतिक एजेंडा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में काम करना चाहती, तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों और अन्य महिला कर्मियों की लंबित मांगों पर भी ध्यान देती।

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस विधायक यशपाल आर्य ने कहा, "देश की आधी आबादी उसकी नारी शक्ति है, और भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण की बात करती है। वे 2026 में संसद के सामने 'नारी वंदन अधिनियम' लेकर आए हैं, जबकि यही बिल मूल रूप से 2023 में ही पारित हो गया था। हमारी मांग है कि 2023 में पारित बिल के आधार पर, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।

यही हमारी मांग है..."

दूसरी ओर महिला आरक्षण बिल पर भाजपा विधायक सविता कपूर ने कहा, "विपक्ष के रवैये की बात करें तो 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लोकसभा में पारित किया जाना था, लेकिन ज़रा विपक्ष का रवैया तो देखिए। यह पहल किसी एक व्यक्ति या किसी खास राजनीतिक दल के लिए नहीं थी, बल्कि, यह महिला आरक्षण सभी महिलाओं के फ़ायदे के लिए और सामूहिक मातृ शक्ति के सम्मान में लागू किया जाना था।"

इसी बीच गन्ने की खेती करने वाले किसानों के भुगतान के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने कहा, "इकबालपुर मिल की ओर किसानों का लगभग 110-120 करोड़ रुपये का बकाया 2018-19 के सीजन से ही लंबित पड़ा है।

इस मामले को लेकर हमने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से कई बार मुलाकात की है, और सदन में भी हमने इस मुद्दे को कई मौकों पर उठाया है, लेकिन, यह सरकार तरह-तरह के बहाने बनाकर उन किसानों हमारे किसानों की दुर्दशा से लगातार आँखें मूंदे हुए है। इस सरकार को इसकी गहरी नींद से जगाने के लिए, इसके कान और आँखें खुलवाने के लिए, हमें यहाँ गन्ना लाने पर मजबूर होना पड़ा।"

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