साहित्यकार भूजेंद्र आरत का निधन, एक अपूरणीय साहित्यिक क्षति
जामताड़ा :
जामताड़ा जिला का नाम साहित्य जगत में बिखेरने वाले एक सधे हुए साहित्यकार भूजेंद्र आरत का सोमवार को असामयिक निधन हो गया। उनके निधन पर साहित्यकारों ने दुख व्यक्त किया है। रहमतुल्लाह रहमत तथा नारायण पौद्वार ने कहा कि भूजेंद्र आरत का हिंदी साहित्य- जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। कहा कि उन्हें बचपन से ही कविता, कहानी, निबंध आदि लेखन से खास दिलचस्पी थी। सिर्फ 23 साल की उम्र में उन्होंने विहान नामक उपन्यास लिखकर प्रकाशित किया जिसमें युवा हृदय की स्पष्ट धड़कन सुनने को मिलती है।
रहमत ने कहा कि वे पेशे से एक शिक्षक थे। नौकरजीवी होने के बावजूद उन्होंने अपने खाली समय का उपयोग पुस्तक लेखन में किया । जिन क्षेत्रों में इनका तबादला हुआ उन क्षेत्रों के ऐतिहासिक, धार्मिक धरोहरों के बारे में किताबें लिखी। विस्मृत स्वतंत्रता सेनानियों पर खूब कलम चलाई और काल की परतों के नीचे दबे अनेक दिवंगत आत्माओं से लोगों का परिचय पुस्तक एवं आलेख लिखकर कराया। उन्होंने कहा कि आरत की 16 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।भारत में प्रकाशित हिंदी के अनेक दैनिक, साप्ताहिक ,पाक्षिक एवं मासिक पत्रिकाओं में उन्होंने खूब लिखा। पटना से निकलने वाले कई साप्ताहिकों में वे नियमित स्तंभकार भी रहे । कहा कि सन 2000 में विश्व सहस्राब्दी हिंदी सेवी सम्मान, सन 2001 में पद्मश्री डॉ लक्ष्मी नारायण दुबे स्मृति सम्मान, सन 2004 में सुभद्रा कुमारी चौहान शतवार्षिकी स्मृति सम्मान से उन्हें सम्मानित किया गया था।
साहित्यकार परिषद जामताड़ा तथा कानन कुसुम काव्योदय मंच, नारायणुर के सभी रचनाकारों एवं सदस्यों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।





