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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:47 · नई दिल्ली संस्करण

टाटा पावर और यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के बीच ऐतिहासिक करार, स्वच्छ ऊर्जा रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
टाटा पावर और यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के बीच ऐतिहासिक करार, स्वच्छ ऊर्जा रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

जमशेदपुर। देश की अग्रणी ऊर्जा कंपनी टाटा पावर और ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य ग्रिड आधुनिकीकरण,फास्ट चार्जिंग,पॉवर स्टोरेज और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में संयुक्त शोध और नवाचार को गति देना है। इसकी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए टाटा स्टील ने गुरुवार को साझा की।टाटा पावर के सीईओ एवं एमडी डॉ.प्रवीर सिन्हा ने बताया कि यह सहयोग तकनीकी अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देगा। दोनों संस्थान संयुक्त कार्यशालाएं, केस स्टडी और एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेंगे। यह समझौता यूनिवर्सिटी के 'वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप' (डब्लूएमजी) और 'स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग' की विशेषज्ञता पर आधारित है, जो ऊर्जा प्रणालियों पर विशेष फोकस के साथ काम कर रहे हैं।यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रोफेसर स्टुअर्ट क्रॉफ्ट ने कहा कि यह साझेदारी अकादमिक उत्कृष्टता और उद्योग अनुभव को जोड़कर सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य की दिशा में ठोस कदम है। वहीं टाटा पावर के सीईओ एवं एमडी डॉ.प्रवीर सिन्हा ने कहा कि कंपनी सस्ती,स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ भारत में ऊर्जा उपयोग के तरीके को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।डब्ल्यूएमजी की डीन प्रोफेसर केरी किरवान ने टाटा समूह के साथ दशकों पुराने संबंधों को इस सहयोग की मजबूत नींव बताया। प्रोफेसर डेविड ग्रीनवुड ने यूके-भारत मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसे ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों के लिए उपयुक्त समय बताया। वहीं स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रमुख प्रोफेसर डेविड टावर्स ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडलिंग और एडवांस कंट्रोल तकनीकों के जरिए ऊर्जा प्रणालियों को अधिक स्थिर और कुशल बनाया जाएगा, जिससे उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

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