झारखंड हाई कोर्ट ने दिव्यांगों की नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार और जेपीएससी से मांगा जवाब
रांची,
29 दिसंबरझारखंड हाई कोर्ट ने सातवीं से 10वीं जेपीएससी परीक्षा
में दिव्यांगों के लिए आरक्षित सात सीटों में से चार सीटों को दूसरे
कैटेगरी के अभ्यर्थियों से भरने को लेकर दाखिल सदानंद कुमार एवं अन्य की
याचिका पर राज्य सरकार एवं जेपीएससी से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन दोनों
को 12 जनवरी तक शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा है कि सातवीं से 10वीं
जेपीएससी परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों में से कितने पद रिक्त हैं, कितने
सफल अभ्यर्थियों ने ज्वाइन नहीं किया है।
इससे पहले जेपीएससी की ओर
से कोर्ट को बताया गया कि उक्त परीक्षा के सभी सीट भर गए हैं। इसलिए सफल
अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है। इस पर जवाब देते हुए
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उनकी जानकारी के अनुसार अभी भी कुछ
सीटें खाली है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी निर्धारित की है।
जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है।
मामले
में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की है। उनकी ओर
से कोर्ट को बताया गया था कि सातवीं से दसवीं जेपीएससी परीक्षा में जो
मेरिट लिस्ट आया उसमें से दिव्यांगों के लिए आरक्षित सात सीटों में से तीन
सीटों को ही भरा गया। बाकी चार सीटों को दूसरे कैटेगरी के अभ्यर्थियों से
भरा गया, जो राज्य सरकार के नियमावली के विरुद्ध है। नियमावली के अनुसार यह
सभी सात सीटें दिव्यांगों अभ्यर्थियों से भरी जानी चाहिए थी।
उन्होंने
कहा कि यदि एलिजिबल अभ्यर्थी नहीं मिलते तो दिव्यांगों की आरक्षित बची सीट
को अगले साल के लिए कैरी-फॉरवर्ड किया जाना चाहिए था लेकिन जेपीएससी ने
ऐसा नहीं किया। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर कहा गया है कि जेपीएससी
द्वारा दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीट को दिव्यांग कोटे से ही भरा जाए। यदि
यह संभव नहीं हो पाता है तो इस सीट को अगले साल कैरी फॉरवर्ड किया जाए।
दिव्यांग कोटे की सीट खाली रहने के बाद उसे अन्य कैटेगरी के अभ्यर्थियों से
नहीं भरा जाए।





