मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:53 · नई दिल्ली संस्करण

बैंकों के निजीकरण के विरुद्ध 15 16 मार्च को हड़ताल

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन

रांची। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के द्वारा 15:00 16 मार्च को देश के नौ बैंक यूनियनों के 10लाख कर्मचारी एवं अधिकारी देशव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कर्मी हिस्सा लेंगे या हड़ताल मुख्य रूप से सरकार द्वारा केंद्रीय बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने के प्रस्ताव के विरुद्ध है । हर साल के समर्थन में विधायक अरूप चटर्जी संयुक्त संयोजक ने कहा कि इस वित्तीय संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का निजीकरण का तीर विरोध करते हैं हम किसान आंदोलन के नियोजित मांगों का भी समर्थन करते हैं उन्होंने कहा कि 1947 के स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर एवं पिछड़े थी उस समय बैंक औद्योगिक एवं व्यवसायिक घरानों के हाथों में था यानी निजी क्षेत्र में था आए दिन बैंकों का फेल या दिवालिया होना आम घटना थी स्वतंत्रता प्राप्ति के 1969 तक लगभग 600 से ज्यादा निजी बैंक फेल हो गए थे आम जनता के करोड़ों रुपए डूब गए थे हजारों लोगों ने आत्महत्या कर ली थी दूसरी तरफ बैंकों में कार्यरत लाखों लोग बेरोजगार हो गए आम जनता एवं श्रमिक संगठनों के सतत संघर्ष के पश्चात सरकार द्वारा 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिसके अंतर्गत 14 बैंकों तथा 1980 में छह बैंक एवं 1975 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना हुई।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने राष्ट्रीयकरण के पश्चात कृषि शिक्षा स्वास्थ्य लघु एवं मध्यम उद्योग तथा सरकार के बड़े उद्योग के अतिरिक्त हरित क्रांति श्वेत क्रांति एवं नील क्रांति आदि एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देश के आर्थिक विकास में चार चांद लगा दिए अमीर घरानों से गरीब घरानों तक का हो गया पिछले 5 दशकों में शनि क्षेत्र के बैंकों की भूमिका जनता के बीच एक विश्वास पैदा की जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती आज देश की बड़ी-बड़ी योजनाएं उद्योग धंधे इसका जीता जागता उदाहरण है बैंकों का ऑपरेटिंग लाभ 910 में 76945 करोड़ों की 2019 में बढ़कर 1 36 करोड़ हो गया लेकिन सरकार की नीतियों से कमजोर करने में आतुर है या जाता रहा है कि बैंकिंग उद्योग को पूंजी पर्याप्तता प्रदान किया जाए लेकिन सरकार के द्वारा इसे नजरअंदाज करते हुए कर्मचारियों की क्षमता की जा रही है या बेटू की बात है कि वर्तमान समय में बैंकिंग उद्योग में सर्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जो घाटा दिखाया जा रहा है उसका कारण है गलत बैंकों के सबसे बड़ी समस्या गैर निष्पादित संपत्ति के द्वारा बार-बार मांग की जाती है कि आने वाले बड़े डिफाल्टर घरानों के कारण है जिस पर क्रिमिनल ऑफेंस के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए लेकिन सरकार इस पर कोई कार्रवाई ना करते हुए कॉर्पोरेट घरानों का ऋण माफ कर उसे अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रही है खेद के साथ कहना पड़ता है कि विश्व पटल पर 1991 से जो नई औद्योगिक आर्थिक नीति अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष विश्व बैंक तथा विश्व व्यापार संगठन के नाम पर उदारवाद की नीति लागू की गई इसके बाद सभी का एकमात्र कार्यक्रम निजी करण ही रहा इस परिपेक्ष में सरकार के द्वारा देश के हित को ना देखते हुए सर्वजनिक क्षेत्रों का निवेश एवं सार्वजनिक क्षेत्र के अंश पूंजी को निजी क्षेत्रों के हाथों में देने की साजिश चलती रही उदारवाद की नीति के बाद हम पिछले 57 सालों के माध्यम से इसका विरोध करते रहे जहां तक इस अवधि में निजी क्षेत्र के लगभग 24 बार फेल हुए जिसे बचाने के लिए उन्हें पीएसबी में विलय किया गया हालत यह रही कि आईसीआईसीआई पीएमसी एवम यस बैंक की घटनाओं से सभी वाकिफ हैं हाल ही में लक्ष्मी विलास बैंक को डीएसजेसी विदेशी बैंक को बेचने की पहल आने वाले दिनों में आईसीआईसीआई एचडीएफसी एवं तथा अन्य निजी बैंकों के लिए खतरे की घंटी है कटु सत्य है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नेताओं की और कर्मचारियों की सेवा प्रभावित होगी तथा बेरोजगारी एवं शादी होगी हम सरकार से तत्काल मांग करते हैं कि बैंकिंग सुधार के नाम पर जो उज्जैन बैंकिंग से अमीर बैंकिंग किए जाने के प्रयास से उसे खत्म करते हुए बैंकों का निजीकरण की प्रक्रिया को बंद करें और बड़े कारपोरेट घरानों की राशि की वसूली के लिए कदम उठाए हम आम सदस्यों को एवं आम नागरिकों से अपील करते हैं कि हमारे आंदोलन को अपने आंदोलन की कड़ी समझ कर अपना सहयोग कर इसे सफल करें और अपनी पूंजी को डूबने से बचा है इस कार्यक्रम में सुनील पंकज कुमार सिन्हा कमला सिंह अरूप चटर्जी राज अंकुर घनश्याम श्रीवास्तव एमएलसी प्रकाश सहित कई लोग शामिल थे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें