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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:34 · नई दिल्ली संस्करण

अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज माघ मेला में संतों से अभद्रता करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग की

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज माघ मेला में संतों से अभद्रता करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग की

हरिद्वार। प्रयागराज के माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद मामले काे लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने मेला प्रशासन के अधिकारियों के आचरण काे गलत बताया है। पुरी महाराज ने इस मामले से जुड़े अधिकारियाें के खिलाफकार्रवाई की मांग की है।मंगलवार काे महंत रविंद्र पुरी ने यहां एक बयान जारी कर कहा कि प्रयागराज माघ मेले में व्यवस्था का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकारियों ने ब्रह्मचारियों और संतों को पीटा और उनकी शिखा पड़कर खींचा। ये दृश्य विचलित करने वाला है। उन्हाेंने कहाकि शिखा सनातन का प्रतीक है, इसलिए शिखा पड़कर खींचना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। महंत रविंद्र पुरी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भी आग्रह किया कि उन्हें भी अब जिद छोड़ देनी चाहिए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गलत बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। पुरी ने कहा कि प्रयागराज में प्रशासन की गलती थी, लेकिन स्नान के नियम कानून भी सब मानते हैं। इसमें सबसे दुखद घटना ये है कि पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मौजूद साधु संतों और वेदपाठी ब्राह्मणों को पीटा। हमने इस मारपीट का विरोध किया है। साथ ही मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने संतों को पीटा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस दुखद घटना को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।उल्लेखनीय है कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद हो गया था। तब से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर हैं। वे प्रशासन पर संगम स्नान से रोकने और उनके साथ के ब्रह्मचारियों और संतों को पीटने के विरोध में धरने पर रहे। जब से प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरने पर बैठे हैं, तब से तमाम संगठन उनके समर्थन में उतर आए हैं। साधु संत भी दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं।

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