मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:34 · नई दिल्ली संस्करण

सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ सम्पन्न

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन

देहरादून,। श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान आराधना श्री दिगम्बर

जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, देहरादून में परम पूज्य गिरनार पीठाधीश

कर्मयोगी क्षुल्लकरत्न श्री समर्पण सागर जी महाराज के सानिध्य में गिरनार

गौरव आचार्य श्री निर्मल सागर जी महाराज, परम पूज्य आचार्य श्री वासुपूज्य

सागर जी महाराज जी का विधानाचार्य पंडित ज्योतिषाचार्य डॉ. सम्मेद जैन

(उपाध्याय) महाराष्ट्र, संगीतकार संतोष पार्टी बड़ौत द्वारा की गई।

इस

अवसर पर पूज्य श्री 105 समर्पण सागर जी महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र का

अर्थ है सिद्धों का समूह। तीन लोक के अग्रभाग पर अनन्तानन्त सिद्ध विराजमान

रहते हैं। उन सबको सिद्धचक्र विधान के माध्यम से नमन किया गया है।

अष्टान्हिका पर्व में प्राय: सभी जगह सिद्धचक्र विधानों के आयोजन देखे जाते

हैं क्योंकि मैना सुन्दरी ने अष्टान्हिका में इसकी विधिवत् आराधना करके

अपने पति एवं सात सौ कुष्ठियों का कुष्ठ रोग दूर किया था। “सिद्ध” यह शब्द

विशेष मंगलसूचक है। इस पद के नामोच्चारण से अनेक कार्यों की सिद्धि होती

है।

मधु जैन ने बताया कि श्री सिद्ध महामंडल विधान श्री 13

तारीख से चल रहा था जिस मे सिद्ध चक्र विधान का जिसमे जो अब तक अनंतानंत

सिद्ध हुए एवं हो रहे तथा होंगे ऐसे सिद्ध भगवान के गुणों की आराधना 8,

16, 32, 64, 128, 512, 1024 इस तरह क्रमश: वृद्धिगत क्रम से अनन्तानन्त

सिद्ध भगवान के गुणो की आराधना की गई और भगवान के सहस्त्र नाम की आराधना और

हवन कर यज्ञ समाप्त किया गया। उत्तर पक्ष और समापन के समय विश्व शांति

महायज्ञ जिसमें सैकड़ो की संख्या में महिलाएं और पुरुषों और और बच्चों ने

भाग लिया। विधान का समापन बहुत ही भक्ति भाव से संपन्न हुआ।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें