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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:58 · नई दिल्ली संस्करण

स्वयं सहायता समूहों को मॉलों में मिलेगा बाजार, सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार में कमाया नाम

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
स्वयं सहायता समूहों को मॉलों में मिलेगा बाजार, सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार में कमाया नाम

-हस्तनिर्मित राखियों से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार, देहरादून में बढ़ी मांग

देहरादून। रक्षाबंधन के मद्देनजर देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हस्तनिर्मित राखियों की मांग बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। जिला प्रशासन महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए देहरादून के प्रमुख मॉल और सचिवालय में राखियों के स्टॉल लगाएगा।

रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में पहचान बना रही है। दोनों नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और आकर्षक डिजाइन की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां बनाने का लक्ष्य रखा है, जिनमें करीब 1,500 राखियां तैयार हो चुकी हैं।

पिछले वर्ष दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बेची थीं, जिससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्होंने कारोबार को विस्तार देने का निर्णय लिया। अलका रावत ने पिछले वर्ष निजी नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला रावत के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान भी शुरू की है।

हस्तनिर्मित राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार से निकलकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी उन्हें ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे और रिबन सहित विभिन्न सामग्रियों से भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू जैसे पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं।

डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी करीब 100 महिलाएं भी विभिन्न डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है। वहीं, सहसपुर विकासखंड के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ सेलाकुई, सहसपुर और विकासनगर क्षेत्र में बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉल में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आमजन से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और अन्य स्थानीय उत्पादों की खरीद कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की।

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री करेंगी।

राखी निर्माण से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की यह पहल नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी समेत जिलेभर की समूह महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।

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