जनगणना में OBC जातियों की अलग लिस्ट की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला- यह नीतिगत मामला...
सुप्रीम कोर्ट ने जनगणना में OBC जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा यह नीतिगत मामला है, सरकार ही फैसला करेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई की। याचिका OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दाखिल की थी, जिसमें डिजिटल फॉर्म में मान्यता प्राप्त OBC जातियों की पहले से तैयार सूची देने की मांग थी। कोर्ट ने निर्देश नहीं दिया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को रजिस्ट्रार जनरल के सामने मांग रखने की छूट दी।

सुप्रीम कोर्ट ने जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की जातियों के लिए अलग सूची उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यह सरकार की नीति से जुड़ा मामला है और इस पर फैसला सरकार ही कर सकती है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी मांग जनगणना के रजिस्ट्रार जनरल के सामने रखने की छूट दी है। यह याचिका OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से दाखिल की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि 2027 में होने वाली ऑनलाइन जनगणना फॉर्म में OBC जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू यानी पहले से तैयार सूची का विकल्प दिया जाए।
याचिका में कहा गया था कि जनगणना शेड्यूल के कॉलम नंबर 10 में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और जाति से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। SC और ST के लिए तो विकल्प मौजूद हैं, लेकिन OBC और अन्य लोगों के लिए जाति दर्ज करने का विकल्प ओपन टेक्स्ट फील्ड के रूप में दिया गया है, जिसमें लोगों को अपनी जाति का नाम खुद लिखना पड़ता है। फेडरेशन का कहना था कि अगर मान्यता प्राप्त OBC जातियों की पहले से लोडेड सूची दी जाएगी, तो लोगों को नाम टाइप करने के बजाय सही विकल्प चुनने में आसानी होगी। इससे अलग-अलग पिछड़ी जातियों को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध करने में मदद मिलेगी और डेटा में गड़बड़ी भी कम होगी।
बुधवार 28 अक्टूबर को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि जनगणना में OBC जातियों को किस तरीके से दर्ज किया जाए, यह नीतिगत फैसला है। इसलिए इस मामले पर सरकार ही विचार कर सकती है। अदालत ने केंद्र सरकार को कोई खास व्यवस्था लागू करने का निर्देश नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि जाति दर्ज करने का तरीका तय करना मूल रूप से नीति से जुड़ा मामला है और इस पर कार्यपालिका को फैसला लेना है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए कहा कि वे अपनी मांग भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के सामने रख सकते हैं।
अदालत ने कहा कि याचिका की एक प्रति अधिकारियों को भेजकर उसे मांग के तौर पर रखा जा सकता है। इसी के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। फेडरेशन की तरफ से पेश वकील अंजनी अयंगर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता पिछड़े वर्गों से आते हैं और उन्होंने सरकार के सामने भी यह मांग रखी थी। उन्होंने दलील दी कि डिजिटल तरीके से आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में ऐसा मेनू जोड़ना तकनीकी रूप से संभव है और इससे 2011 की जनगणना की तरह डेटा का बेहतर संकलन हो सकेगा। अब इस मुद्दे पर अंतिम फैसला जनगणना प्राधिकरण और केंद्र सरकार को लेना है कि 2027 की डिजिटल जनगणना में OBC जातियों के लिए माउस क्लिक वाला विकल्प होगा या नाम लिखने वाला पुराना तरीका ही जारी रहेगा।




