'सॉफ्ट पॉवर' के जरिए विदेशी वर्चस्व का मुकाबला कर रहा है भारत: विदेश मंत्री
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत आज अपनी सॉफ्ट पॉवर (सांस्कृतिक शक्ति) के कारण दुनिया में अधिक प्रासंगिक बन गया है तथा खुद पर थोपे गए मूल्यों और व्यवस्थाओं का प्रतिकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, बहुलवाद, बंधुत्व और कार्य संस्कृति भारत की सॉफ्ट पॉवर के आधार संतभ हैं।जयंशकर ने बुधवार को अंग्रेजी पुस्तक ‘संस्कृति के जरिए जुड़ाव : भारत की सॉफ्ट पावर ताकत का एक सिंहावलोकन’ (कनेक्टिंग थ्रॉ कलचर) पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी मौजूद रहे। पुस्तक में लेखों का संकलन है, जिसका संपादन डॉ विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे और डॉ सचिदानंद जोशी ने किया है।इस मौके पर विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देश और संस्थाएं खुद को लोकतंत्र का ठेकेदार मानते हुए यह तय करती हैं कि लोकतंत्र का क्या रूप और तौर-तरीके हों। वह अपने ओर से तय मानदंडों के अनुसार फैसला सुनाती हैं कि कौन सा देश या देश विशेष लोकतंत्र के निश्चित मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। जयशंकर ने कहा कि हमें ऐसे प्रयासों का जवाब देना होगा।उन्होंने कहा कि समकालीन दुनिया में यह एक हकीकत है कि कुछ देश और संस्थाएं अपने मूल्यों और जीवनशैली और अपने मानकों दूसरों पर थोपने की कोशिश करती हैं। सांस्कृतिक शक्ति कुछ अर्थों में आर्थिक और सैन्य शक्ति से भी ज्यादा प्रभावी सिद्ध होती है। यह दुनिया में वर्चस्व कायम करने का एक माध्यम बन गई है। उन्होंने कहा कि जहां तक भारत का संबंध है वह सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया में अपनी सकारात्मक छवि पेश करता है। सॉफ्ट पावर का अगला चरण अपने प्रभाव में वृद्धि करना है। इसका अतिवादी रूप वर्चस्व कायम करना और दूसरों पर अपनी बात थोपना है।





