आरटीजीएस की सुविधा आज रात 12.30 बजे से 24*7 घंटे
रिजर्व बैंक ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) की सुविधा ग्राहकों के लिए 14 दिसंबर की रात साढ़े 12 बजे से सातों दिन 24 घंटे यानी हर वक्त उपलब्ध कराने का ऐलान किया है. मतलब यह कि ग्राहक कभी भी और किसी भी वक्त आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे. इसके साथ ही अब भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहां यह सुविधा दिन रात काम करती है.
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि कोरोना काल में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में काफी तेजी आई है. जिसके बाद आरबीआई ने भारतीय वित्तीय बाजार के ग्लोबल इंटीग्रेशन की कोशिशों को सहारा देने के लिए आरटीजीएस की सुविधा 24*7 घंटे उपलब्ध कराने का फैसला किया.
डिजिटल फंड ट्रांसफर करने का एक तरीका है आरटीजीएस
आरटीजीएस डिजिटल फंड ट्रांसफर करने का एक तरीका है. इसकी मदद से बेहद कम समय में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं. आरटीजीएस का उपयोग मुख्य रूप से बड़ी राशि के ट्रांसफर के लिए होता है. इसके तहत न्यूनतम 2 लाख रुपये भेजे जा सकते हैं. अधिकतम राशि भेजने की सीमा 10 लाख रुपये है. आरबीआई ने आरटीजीएस के जरिए 2 लाख से 5 लाख तक का फंड ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम शुल्क 24.5 रुपये रखा है और 5 लाख से अधिक के फंड ट्रांसफर के लिए बैंक अधिकतम 49.5 रुपये का शुल्क ले सकता है. इस पर जीएसटी भी देनी पड़ती है. देश क ा सबसे बड़े बैंक एसबीआई आरटीजीएस के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है.
26 मार्च 2004 को हुई थी आरटीजीएस की शुरुआत
आरटीजीएस की शुरुआत 26 मार्च 2004 को हुई थी. उस समय केवल 4 बैंक ही इस सेवा से जुड़े थे. लेकिन अब देश के करीब 237 बैंक इस प्रणाली के माध्यम से 4.17 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन को प्रतिदिन पूरा करते हैं. नवंबर में आरटीजीएस से औसत 57.96 लाख रुपये का लेनदेन हुआ. अभी दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर महीने के सभी वर्किंंग डे पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक ही आरटीजीएस की मदद से फंड ट्रांसफर किया जाता है. इससे पहले आरबीआई ने नेफ्ट के नियमों में भी बदलाव किया था. नेफ्ट की सुविधा दिसंबर 2019 से 24 घंटे उपलब्ध है. नेफ्ट भी पेमेंट का एक तरीका है. लेकिन इसमें पैसे ट्रांसफर की प्रक्रिया कुछ समय बाद पूरी होती है.





