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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:42 · नई दिल्ली संस्करण

फतेहाबाद : पोती से दरिंदगी करने वाले दादा को अंतिम सांस तक उम्रकैद व दो लाख जुर्माना

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
फतेहाबाद : पोती से दरिंदगी करने वाले दादा को अंतिम सांस तक उम्रकैद व दो लाख जुर्माना

फतेहाबाद। रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में फतेहाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मंगलवार को संवेदनशील मामले में फैसला सुनाया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने अपनी 9 साल की पोती के साथ दरिंदगी करने वाले दोषी सूरजभान निवासी सनियाना को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है।

अदालत ने उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी किया है। अदालत में चले मामले के अनुसार दिसंबर 2024 में थाना भूना के अंतर्गत गांव सनियाना की एक महिला ने पुलिस को शिकायत दी थी। महिला ने आरोप लगाया था कि उसका मामा ससुर (रिश्ते में दादा) उनकी मासूम बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म कर रहा है और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में साबित किया कि दोषी सूरजभान पहले भी अपनी सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट चुका था।

वह जमानत पर बाहर आया था, लेकिन सुधरने के बजाय उसने अपनी ही 9 वर्षीय मासूम पोती को हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया। इस पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज कर उसको गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में जिला न्यायवादी देवेन्द्र मित्तल और सहायक जिला न्यायवादी नवीन ने अदालत में पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने अभियोजन के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि दोषी समाज के लिए खतरा है। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे आदतन अपराधी किसी भी रियायत के हकदार नहीं हैं। इस मामले में अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) व 6 के तहत शेष प्राकृतिक जीवन यानि अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई।

इसके अलावा बीएनएस की धारा 351(3)) के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी पर 2 लाख का जुर्माना भी किया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि में से एक लाख रुपये पीड़ित बच्ची को आर्थिक सहायता और मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी और कोर्ट के त्वरित फैसले ने न्याय प्रणाली में आम जनता का विश्वास मजबूत किया है। यह सजा उन अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो पारिवारिक रिश्तों की आड़ में मासूमों का बचपन छीनने का दुस्साहस करते हैं।

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