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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:14 · नई दिल्ली संस्करण

फतेहाबाद में नाबालिग बालिका के अपहरण-दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 वर्ष की सश्रम कैद

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
फतेहाबाद में नाबालिग बालिका के अपहरण-दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 वर्ष की सश्रम कैद

फतेहाबाद। फतेहाबाद में नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में विशेष पोक्सो अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।इसके साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा POCSO एक्ट के तहत सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 1 लाख रुपये पीडि़त बच्ची को बतौर मुआवजा दिए जाएंगे। फैसला सुनाते हुए जज ने कड़ी टिप्पणी की कि दोषी ने इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने और मासूम की जिंदगी तबाह करने से पहले एक पल भी नहीं सोचा। इस मामले में सरकारी वकीलों द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोषी को किसी भी तरह की राहत न देते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है।सोमवार को जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल ने बताया कि यह मामला 28 जून 2024 को सामने आया था। तब पीडि़त परिवार ने थाना सदर फतेहाबाद में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी अचानक घर से लापता हो गई है। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर तलाश शुरू की थी। पुलिस टीम ने कड़ा संज्ञान लेते हुए 31 जुलाई 2024 को पीडि़ता को राजस्थान से सकुशल बरामद किया। जांच के दौरान इस घिनौने अपराध में आरोपी विक्रम उर्फ रोकी की संलिप्तता पाई गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मेडिकल रिपोर्ट और पीडि़ता के बयानों के आधार पर केस में पोक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी गई। अदालत ने दोषी विक्रम को धारा 363 के तहत 7 साल, धारा 366 के तहत 10 साल और पोक्सो एक्ट की धाराओं 4(2) व 6 के तहत 20-20 साल की कठोर कैद सुनाई है। जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल और सहायक जिला न्यायवादी नवदीप की प्रभावी पैरवी के कारण सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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