मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:45 · नई दिल्ली संस्करण

पंजाब सरकार ने बेअदबी से जुड़ा बिल हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल भेजा: भगवंत मान

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पंजाब सरकार ने बेअदबी से जुड़ा बिल हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल भेजा: भगवंत मान

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने हाल ही में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अपमान से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई के लिए 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल 2026' को विधानसभा में सर्वसम्मति से पास किया था। अब इस बिल को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी। सीएम मान ने अपने पोस्ट में लिखा, "श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अपमान के विरुद्ध विधानसभा में पारित अधिनियम को हस्ताक्षर हेतु राज्यपाल के पास भेज दिया गया है।"

13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल 2026 को पारित किया गया था। इसे सभी दलों की सहमति से पास किया गया।

इसका मकसद ऐसे मामलों पर रोक लगाना है जिनमें धार्मिक ग्रंथ का अपमान होता है और समाज में तनाव की स्थिति पैदा होती है।

इस संशोधित कानून में बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का दोषी पाया जाता है तो उसे आजीवन कारावास की सजा मिलेगी यानी दोषी को मृत्यु होने तक सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

इसके साथ ही 25 लाख रुपए तक के भारी जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।

विधेयक में यह भी साफ किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच केवल गजटेड अधिकारी या उससे ऊपर के स्तर का अधिकारी ही कर सकेगा। साथ ही इस कानून में किसी भी तरह के समझौते या समझौता आधारित निपटारे की अनुमति नहीं दी गई है।

सरकार का कहना है कि यह कानून समाज में एक सख्त संदेश देगा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही या अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या राज्यपाल द्वारा इसको मंजूरी दी जाएगी या नहीं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें