बुन्देलखंड में मटर की फसल ने किसानों को दिया बड़ा झटका
बुन्देलखंड में मटर की फसल ने किसानों को दिया बड़ा झटका- पैदावार कम होने से किसानों में छायी मायूसीहमीरपुर, 01 मार्च । हमीरपुर समेत बुन्देलखंड क्षेत्र में इस बार मटर की फसल ने किसानों को रोने पर मजबूर कर दिया है। समय से पहले मटर की फसल तैयार होने पर किसान खेतों में मटर की कटाई और थ्रेसिंग कराने में जुटा है लेकिन इस बार इसकी पैदावार कम होने से किसानों को लागत भी निकालने के लाले पड़ गए है। कुछ सालों से लगातार मटर की फसल में झटका खाने के बाद किसानों ने अबकी बार इसकी पैदावार न करने का मन बनाया है।हमीरपुर जिले में इस बार किसानों ने मटर की खेती के लिए रकबा बढ़ाया था। बम्पर पैदावार की उम्मीद पाले किसानों ने क्षेत्रफल बढ़ाते हुए 16166 हेक्टेयर में मटर की बोआई कराई थी। जो लक्ष्य से सौ फीसदी से अधिक है। जिले के सुमेरपुर, मौदहा, कुरारा, मुस्करा, गोहांड, राठ, और सरीला क्षेत्र में इस बार किसानों ने बड़े ही उत्साह से मटर की खेती की थी। बुन्देलखंड के महोबा, बांदा, चित्रकूट समेत अन्य जिलों में भी इस बार मटर की फसलें देख किसानों में बड़ी खुशी दे जा रही थी मगर फरवरी माह में तेज धूप और गर्मी पडऩे से फसलें पककर तैयार हो गई।समय से पहले फसलों के पकने पर किसानों ने इसकी कटाई और थ्रेसिंग कराई तो उत्पादन कम देख उनके होश उड़ गए। भैंसापाली गांव के किसान अरविन्द कुशवाहा ने बताया कि दस बीघा जमीन, अस्सी हजार रुपये में ठेके पर एक साल के लिए ली गई थी। खेत में 22 किलो प्रति बीघा के हिसाब से 1.80 क्विंटल मटर के बीज बोये गए लेकिन अब तो इस बार लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बताया कि अच्छी खासी लागत लगाने के बाद सिर्फ 16 क्विंटल मटर पैदा हुआ है जिसमें खर्च भी नहीं निकल रहा है।जखेला गांव के किसान अंकित सिंह समेत अन्य तमाम लोगों ने बताया कि 40 बीघा खेत में मटर की खेती से इस बार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले बार भी मटर के भाव बाजार में गिरने से किसान घाटे में रहे है और इस बार भी इस फसल ने किसानों को रुलाकर रख दिया है। इसीलिए अबकी बार इस फसल को नमस्कार किया जाएगा।तेज धूप के कारण मटर के दाने हो गए छोटेउपनिदेशक कृषि हरीशंकर भार्गव ने बताया कि इस बार यहां हजारों किसानों ने 16166 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मटर की बोआई की थी। वहीं मंडल के अन्य जिलों में भी इससे कई गुना हेक्टेयर क्षेत्रफल में मटर की खेती में किसानों ने दांव लगाया था। बताया कि फरवरी माह सर्दी का सीजन होता है लेकिन मौसम में आए बदलाव से इस फसल पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एसपी सोनकर ने बताया कि गर्मी का पारा ज्यादा होने की वजह से मटर के दाने छोटे हो गए है। मटर की फसल में लगने वाली फलियों में भी तेज धूप के कारण दाने नहीं पड़ पाए है। इसीलिए पैदावार में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है।





