मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:56 · नई दिल्ली संस्करण

पाकिस्तान: महिला प्रिंसिपल ने मुहम्मद साहब की जगह खुद को बताया इस्लाम का पैगंबर, कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

महिला पेशे से एक प्राइवेट स्कूल में प्रिंसिपल है। उसने 2013 में खुद को इस्लाम का पैगंबर बताया था।

पाकिस्तान में ईश निंदा करने पर एक महिला को मौत की सजा सुनाई गई है। महिला पर आरोप था कि उसने 2013 में मुहम्मद साहब को इस्लाम का पैगंबर मानने से इनकार कर दिया था और खुद को पैगंबर बताया था, जिसके बाद लाहौर पुलिस ने उस पर ईश निंदा का मुकदमा दर्ज किया था।

पेशे से प्रिंसिपल है महिला

लाहौर के निश्तर कालोनी की रहने वाली महिला सलमा तनवीर पेशे से एक प्राइवेट स्कूल में प्रिंसिपल है। जिला अदालत ने महिला के खिलाफ सुनवाई करते हुए उसे मौत की सजा तो सुनाई ही है साथ ही उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट ने खारिज किया हर दावा

महिला के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि महिला मानसिक रूप से बीमार है और इस तरह की उल्टी-सीधी बात करती रहती है। लेकिन महिला की मेडिकल रिपोर्ट में साफ हो गया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है। इसके बाद कोर्ट ने महिला को मौत की सजा सुनाई।

पाकिस्तान में विवादित है ईश निंदा कानून

पाकिस्तान में ईश निंदा कानून काफी विवादित है, क्योंकि इस कानून में सजा का प्रावधान बहुत ही कड़ा है। 1987 से लेकर अब तक 1472 लोगों पर ईशनिंदा का आरोप पाकिस्तान में लगाया गया है। खास बात यह है कि ईशनिंदा के आरोपी अक्सर अपने पसंद का वकील करन से वंचित रह जाते हैं क्योंकि इस तरह के संवेदनशील मु्द्दे को कोई छूना नहीं चाहता। ईशनिंदा कानून औपनिवेशिक दौर के कानून हैं, लेकिन पूर्व तानाशाह जनरल जियाउल हक ने इनमें संशोधन किया था जिससे निर्धारित दंड की गंभीरता बढ़ गई।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें