नहीं थम रहा राइट टू हेल्थ का विरोध, स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कर डाली कई अन्य मांगें
नहीं थम रहा राइट टू हेल्थ का विरोध, स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कर डाली कई अन्य मांगेंजयपुर, 27 फरवरी । राज्य की सत्तारूढ़ गहलोत सरकार की ओर से आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार देने के लिए बिल लाया जा रहा है, लेकिन राइट टू हेल्थ बिल आने से पहले ही उसका विरोध हो रहा है। यह विरोध निजी अस्पतालों की ओर से किया जा रहा है।पहले इस विरोध में निजी अस्पतालों ने सरकारी योजनाओं को बंद कर सरकार को अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब निजी अस्पतालों में सरकारी योजनाओं को वापस शुरू कर दिया है। स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी की तरफ से 10 मार्च तक का समय दिया गया है। कमेटी ने कहा है कि 10 मार्च तक अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती है तो वे फिर अस्पताल बंद कर आंदोलन करेंगे।अब ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कहा है कि आंदोलन स्थगित किया है, इसे वापस नहीं लिया है। कमेटी ने कहा है कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं में तर्क और अनुचित पैकेज दरें हैं, इसलिए गुणवत्तापूर्ण उपचार असंभव है। इस पर सुधार कर सुझाव के लिए डॉक्टर और अस्पताल संचालकों को कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए। समिति चेयरमैन डॉक्टर सुनील सिंह ने कहा कि 70 फीसदी आबादी की सेवा करने वाले निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को उद्योग का दर्जा दिया जाना चाहिए। इनके सुचारू संचालन के लिए कम लागत की बिजली आपूर्ति, 5 वर्ष में फायर एनओसी का नवीनीकरण, पुराने चल रहे अस्पताल भवनों को नियमित करने जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए।स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी के डॉक्टर्स ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात करने के बाद फाइनेंस सेक्रेट्री अखिल अरोड़ा मुलाकात की थी। अब डॉक्टर्स सीएस उषा शर्मा से मुलाकात करेंगे और अपनी बात रखेंगे। राजस्थान विधानसभा का सत्र चल रहा है और इस बजट सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से राइट टू हेल्थ बिल लाना तय माना जा रहा है। ऐसे में अस्पतालों की ओर से इस बिल का विरोध किया जा रहा है।





