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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:38 · नई दिल्ली संस्करण

देहरादून में 236 करोड़ की नशीली दवाएं नष्ट, एनसीबी का अभियान तेज

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
देहरादून में 236 करोड़ की नशीली दवाएं नष्ट, एनसीबी का अभियान तेज

नई दिल्ली। भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बड़ी कार्रवाई करते हुए 236 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की जब्त नशीली दवाओं को नष्ट किया है। इस कदम को देश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

एनसीबी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि देहरादून में कुल 303 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थों को नियमानुसार नष्ट किया गया। ये नशीले पदार्थ 11 अलग-अलग प्री-ट्रायल और पोस्ट-ट्रायल मामलों से संबंधित थे। नष्ट किए गए पदार्थों में ट्रामाडोल टैबलेट, अल्प्राजोलम टैबलेट और चरस जैसी प्रतिबंधित एवं नियंत्रित नशीली सामग्री शामिल थी।

ब्यूरो के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल अवैध मादक पदार्थों को पूरी तरह समाप्त करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि जब्त की गई नशीली सामग्री किसी भी परिस्थिति में दोबारा अवैध बाजार में न पहुंच सके।

एनसीबी ने कहा कि बड़ी मात्रा में ड्रग्स का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करना एजेंसी की प्रभावी कार्यप्रणाली और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दर्शाता है।

अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में देशभर में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान को और तेज किया गया है। इसके तहत न केवल तस्करों और गिरोहों पर कार्रवाई की जा रही है, बल्कि जब्त किए गए मादक पदार्थों के शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है, ताकि इनके दुरुपयोग की कोई संभावना न रहे।

एनसीबी ने अपने संदेश में कहा कि भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से ब्यूरो ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास किसी भी प्रकार की नशीली दवाओं की तस्करी, बिक्री या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल साझा करें।

जानकारी देने के लिए एनसीबी ने 'मानस' हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर 1933) का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिक इस माध्यम से गोपनीय रूप से सूचना दे सकते हैं। ब्यूरो ने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाती है।

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