मुस्कान को मेरठ में नहीं, इस जेल में दी जाएगी फांसी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
मेरठ के सौरभ हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी को अगर फांसी की सजा मिलती है तो उसे मेरठ में नहीं, मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी। इसकी वजह जेल मैनुअल है। यूपी में मथुरा इकलौती महिला सेंट्रल जेल है जहां महिला फांसी घर मौजूद है। मेरठ जेल में महिला फांसी घर नहीं है। मुस्कान अभी मेरठ जेल में बंद है, सजा होने पर उसे मथुरा शिफ्ट किया जाएगा।

मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी इस समय मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बंद है। इस चर्चित हत्याकांड में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने पति सौरभ की हत्या कर दी थी और शव को ड्रम में सीमेंट से भरकर छिपा दिया था। पूरे देश को हिला देने वाले इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कोर्ट मुस्कान को फांसी की सजा सुनाता है, तो उसे फांसी कहां दी जाएगी? कानूनी और जेल प्रशासन के नियमों के मुताबिक मुस्कान को मेरठ जेल में फांसी नहीं दी जा सकती। उसे इसके लिए मथुरा जेल ले जाया जाएगा।
इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था है। उत्तर प्रदेश में कुल 70 से ज्यादा जिला जेल हैं, लेकिन महिला बंदियों के लिए केवल एक ही जेल ऐसी है जहां फांसी देने की पूरी व्यवस्था है और वह है मथुरा जिला जेल। मथुरा जेल उत्तर प्रदेश की इकलौती महिला केंद्रीय कारागार है। साल 1850 में बनी यह जेल पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए आदर्श जेल मानी जाती है। जेल मैनुअल के अनुसार, किसी भी महिला बंदी को फांसी की सजा होने पर उसे उसी जेल में रखा जाता है जहां महिला फांसी घर मौजूद हो। मेरठ जिला जेल में पुरुषों के लिए फांसी घर है, लेकिन महिलाओं के लिए अलग से फांसी घर की व्यवस्था नहीं है। यही नहीं, मेरठ जेल में महिला बैरक तो है, लेकिन वह केवल अस्थायी रूप से सजायाफ्ता और विचाराधीन महिला कैदियों के लिए है। जबकि मथुरा जेल में महिलाओं के लिए स्थायी फांसी का तख्ता, जल्लाद की व्यवस्था और मेडिकल टीम की पूरी तैयारी मौजूद है।
इतिहास पर नजर डालें तो मथुरा जेल में आजादी के बाद से अब तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है। उत्तर प्रदेश में आखिरी बार किसी महिला को फांसी 1950 के दशक में दी गई थी। लेकिन नियमानुसार, अगर किसी महिला को मृत्युदंड की सजा मिलती है, तो उसे मथुरा ही शिफ्ट किया जाता है। मुस्कान के केस में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वर्तमान में मुस्कान की स्थिति की बात करें तो वह मेरठ जेल में काफी परेशान बताई जा रही है। जेल सूत्रों के मुताबिक वह प्रेग्नेंसी का हवाला देकर सहानुभूति लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन मेडिकल जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जेल प्रशासन ने उसे अन्य महिला कैदियों के साथ रखा है और उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस में आ सकता है। जिस बर्बरता के साथ सौरभ की हत्या की गई, शव के 15 टुकड़े किए गए और फिर उसे छिपाने की कोशिश की गई, वह कोर्ट को सख्त सजा देने पर मजबूर कर सकता है। अगर निचली अदालत फांसी की सजा सुनाती है, तो भी मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। लेकिन जेल प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। अगर कोर्ट से फांसी की सजा का फैसला आता है, तो मुस्कान को सुरक्षा घेरे में मेरठ से मथुरा जेल ट्रांसफर कर दिया जाएगा। मथुरा जेल में ही उसका डेथ वारंट जारी होगा और वहीं फांसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल मुस्कान और साहिल दोनों ही न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस ने उनके खिलाफ 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर ली है।
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