मेरठ: पति सौरभ की हत्या कर नीले ड्रम में सील करने वाले मुस्कान-साहिल को मौत की सजा
मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने 14 अक्टूबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। दोनों पर मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को 5 टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में सीमेंट से सील करने का आरोप था। 30 सितंबर को दोनों दोषी करार हुए थे। पेशी पर मुस्कान बोली- बच्चियों का ख्याल रखना। 126 तारीखों, 22 गवाहों की सुनवाई के बाद यह फैसला आया।

यूपी के सबसे चर्चित मेरठ नीले ड्रम हत्याकांड में आज अदालत ने अंतिम फैसला सुना दिया। मेरठ की जिला अदालत ने मर्चेंट नेवी के पूर्व अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की कोर्ट ने यह फैसला 14 अक्टूबर 2026 को सुनाया। अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज में भय पैदा करने वाला है और इस तरह के जघन्य अपराध में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए।
सजा सुनाने से पहले सुबह 10:30 बजे दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया। जज ने दोनों से पूछा कि सजा पर कुछ कहना चाहते हो? साहिल ने चुप्पी साध ली, जबकि मुस्कान ने कहा - मेरे बच्चे का ध्यान रखना। जैसे ही जज ने फांसी की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने का ऐलान किया, मुस्कान फूट-फूटकर रोने लगी। उसके वकील ने दो छोटी बेटियों और बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देकर फांसी न देने की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। सरकारी वकील कृष्ण कुमार चौबे ने शुरू से ही मृत्युदंड की मांग की थी। यह वारदात 3 मार्च 2025 की है। सौरभ राजपूत लंदन में नौकरी करते थे और 24 फरवरी 2025 को मेरठ इंद्रा नगर स्थित अपने घर लौटे थे। अभियोजन के मुताबिक, पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल के बीच संबंध में सौरभ बाधा बन रहे थे।
आरोप है कि मुस्कान ने सौरभ को नींद की दवा देकर बेहोश किया, फिर साहिल को घर बुलाया। दोनों ने मिलकर चाकू से सौरभ की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव के 5 टुकड़े किए गए और उन्हें एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया गया। सौरभ के परिवार को शक होने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली और ड्रम से शव बरामद किया। इस क्रूरता ने पूरे देश को हिला दिया था। मामला 17 मार्च 2025 को कोर्ट पहुंचा, 19 मार्च को दोनों को मेरठ जेल भेजा गया। जुलाई 2025 में ट्रायल जिला जज की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। 126 से ज्यादा तारीखों पर सुनवाई हुई, 22 से अधिक गवाहों के बयान हुए। पुलिस ने ड्रम, सीमेंट खरीदने के बिल, टेक्निकल और फॉरेंसिक सबूत पेश किए।
30 सितंबर 2026 को कोर्ट ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया था, और सजा पर बहस के लिए 15 दिन का समय दिया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में उचित सजा दी जानी चाहिए। फांसी की सजा के साथ इस सनसनीखेज केस का पहला अध्याय पूरा हो गया है, अब मामला हाईकोर्ट में अपील के लिए जाएगा।
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