सामूहिक कलशो की पूजा अर्चना के साथ माता कुष्मांडा का आह्वान किया गया
रांंची : श्री वैष्णवी शिव राम सेवा संस्थान के तत्वाधान में देवी दर्शन महायज्ञ महोत्सव समिति द्वारा आयोजित भव्य सामूहिक 1,111 कलश स्थापना एवं देवी दर्शन महोत्सव के चौथे दिन भी प्रथा 8:00 बजे से मंडप पूजन देवी भागवत परायण पश्चात संकल्प कर्ताओं द्वारा सामूहिक कलशो की पूजा अर्चना के साथ माता कुष्मांडा का आह्वान किया गया । आचार्य सतीश चंद्र मश्रिा ने भक्तों को बताया कि नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना करने से आयु यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है । माता का यह स्वरूप देवी पार्वती के विवाह के बाद से लेकर संतान कुमार कार्तिकेय की प्राप्ति के बीच का है । इस स्वरूप में देवी संपूर्ण सृष्टि को धारण करने वाली और उनका पालन करने वाली है । संतान की इच्छा रखने वाले लोगों को देवी के इस स्वरूप की पूजा आराधना की पूजा आराधना करनी चाहिए। मां का यह स्वरूप मुस्कुराहट वाला है कहा जाता है , कि जब सृष्टि का अस्तत्वि नहीं था तो देवी भगवती के इसी स्वरूप से मंद मंद मुस्कुराते हुए सृष्टि की रचना की थी।
इस समारोह में समिति के अन्य सदस्यों के साथ विनय कुमार सिंह ,बि एन ठाकुर, एनके सन्हिा ,विवेक सन्हिा ,आनंद कुशवाहा ,अनु रंजीत ,शिव शंकर यादव तथा समाज के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे । 21 अक्टूबर को माता स्कंदमाता के आह्वान के साथ महायज्ञ का शुभारंभ होगा।





