मार्केटिंग बोर्ड की बदहाली जल्द होगी दूर, फाइल भेजी गयी सीएमओ
रांची, धनबाद, जमशेदपुर की तर्ज पर 414 एकड़ जमींन पर विकसित किये जायेंगे मार्केट
विपिन कुमार सिंह
रांची : बदहाल मार्केटिंग बोर्ड में एक बार फिर से रौनक लौटेगी। रांची,धनबाद और जमशेदपुर की तर्ज पर बोर्ड के पास खाली पड़ी 414 एकड़ जमींन में मार्केट बनाये जाने की योजना है। इसके साथ ही बोर्ड में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी को भी पुरा किया जायेगा। वर्तमान में बोर्ड के पास फिक्स डिपॉजिट 45 करोड़ रुपये है। इसके एवज में मिल रहे बैंकों के ब्याज 2.5 करोड़ रुपये से पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और बोर्ड के अन्य विकास से संबंधित योजनाओं को अम्लीजामा पहनाया जा रहा है।
जल्द मिलंेगे बाजार समिति को एक फीसदी टैक्स वसूलने का अधिकार
झारखंड मार्केटिंग बोर्ड को राज्य सरकार पुन: पुर्नगठित करेगी। इसके तहत राज्य के सभी 28 बाजार समितियों में बड़े पैमाने पर बदलाव किये जायेगा। 2015 से पूर्व की तरह ही बाजार समिति को एक फीसदी टैक्स वसूलने का अधिकार होगा। इसके लिए कृषि विभाग ने प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा है।
896 कर्मियांे में बचे हैं सिर्फ 173
मार्केटिंग बोर्ड की माने तो कई वर्षो से पदाधिकारियों और कर्मियों की कोइ बहाली नही हुई है। झारखंड राज्य गठन के उपरांत मार्केटिंग बोर्ड में कुल कर्मियों की संख्या 896 थी। परन्तु अब संख्या घट कर 173 हो गयी है। इसमें कई कर्मी अनुकंपा पर है। वर्ष 2000 से अबतक एक भी बहाली नही हुई है।
राज्य बंटवारा के बाद बिहार से अबतक बोर्ड को नही मिली है 16 करोड़ की बकाया राशि
झारखंड राज्य गठन के उपरांत मार्केटिंग बोर्ड को बिहार सरकार से मिलने वाली राशि 16 करोड़ रुपये अबतक मार्केटिंग बोर्ड को प्राप्त नही हुआ है। बिहार सरकार के अनुसार देय राशि 6 करोड़ रुपये बतायी जा रही है। जबकि बोर्ड के अनुसार यह राशि 16 करोड़ रुपये है।
बोर्ड में अध्यक्ष की जल्द होगी नियुक्ति ,तभी हो सकेगा परिवर्तन
मार्केटिंग बोर्ड की ओर से राज्य सरकार को एक फाइल भेजी गयी है,जिसमें कहा गया है कि मार्केटिंग बोर्ड के अध्यक्ष वर्तमान में कौन है इसकी जानकारी बोर्ड को नही है। मालुम हो कि मार्केटिंग बोर्ड के तत्क ालीन अध्यक्ष विधायक गणेश गंझु थे। परन्तु अब वे बोर्ड के अध्यक्ष है अथवा नही बोर्ड को जानकारी नही है। अगर बोर्ड में अध्यक्ष पद भर दिये जायेंगे तो मार्केटिंग बोर्ड के काम आसान हो जायेंगे। वर्तमान में प्रशासनिक विभाग विकास योजनाओं से संबंधित अधिकत्तम 20 लाख रुपये ही खर्च कर पाती है। बोर्ड अध्यक्ष के आ जाने के बाद यह राशि करोड़ो में होगी।





