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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

भारतीय शिक्षा बोर्ड का बड़ा कदम: स्वामी रामदेव की मौजूदगी में व्यावसायिक शिक्षा के लिए 3 प्रमुख सेक्टर स्किल कौंसिलों के साथ MoU साइन

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
भारतीय शिक्षा बोर्ड का बड़ा कदम: स्वामी रामदेव की मौजूदगी में व्यावसायिक शिक्षा के लिए 3 प्रमुख सेक्टर स्किल कौंसिलों के साथ MoU साइन

स्कूल से ही प्रशस्त होगी रोजगार की राह

हरिद्वार। स्कूली शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड ने महत्वपूर्ण पहल की है। स्वामी रामदेव की मौजूदगी में भारतीय शिक्षा बोर्ड ने तीन प्रमुख कौशल परिषदों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। नोएडा स्थित बोर्ड मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में पर्यटन एवं आतिथ्य, हस्तशिल्प एवं कालीन तथा हरित रोजगार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा देने पर सहमति बनी।

इन समझौतों के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप स्कूल स्तर से ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करना है, जिनके आधार पर वे शिक्षा पूरी करने के बाद शीघ्र रोजगार प्राप्त कर सकें अथवा अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे कौशल विकसित करने की है,जिन्हें सीखकर हमारे युवा शीघ्र रोजगार प्राप्त कर सकें या स्वरोजगार शुरू कर सकें। युवाओं के लिए केवल शिक्षित होना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि कुशल और दक्ष होना भी समय की मांग है। इसी उद्देश्य से देश की अग्रणी कौशल परिषदों के साथ साझेदारी की जा रही है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस एनपी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप बोर्ड ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे पर आधारित रोजगार-केंद्रित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को अधिक किफायती,सुलभ और सार्थक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, ताकि गुणवत्तापूर्ण कौशल आधारित शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंच सके।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के तहत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को स्तर-1 से स्तर-10 तक मानकीकृत किया गया है। इससे विद्यार्थियों और नियोक्ताओं को यह समझने में आसानी होगी कि किसी पाठ्यक्रम का संबंध आगे की पढ़ाई और रोजगार की किन भूमिकाओं से है।

कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्तर-1 से स्तर-4 तक के पाठ्यक्रम तैयार और अनुकूलित किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों का विकास राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान तथा विभिन्न क्षेत्रीय कौशल परिषदों के सहयोग से किया गया है। कुछ पाठ्यक्रम पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान,भोपाल द्वारा विकसित किए गए हैं।

भारतीय शिक्षा बोर्ड ने पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद,हस्तशिल्प एवं कालीन क्षेत्र कौशल परिषद तथा हरित रोजगार कौशल परिषद के साथ समझौते किए हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ पहले से चल रही साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।

इस पहल से स्कूली शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से पर्यटन,हस्तशिल्प,कालीन उद्योग और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुलेगा।

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