TMC सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर SC की फटकार, कहा- SEBI स्वतंत्र संस्था...
सुप्रीम कोर्ट ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी। मोइत्रा ने SEBI को कुछ मामलों में जांच के लिए निर्देश देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि SEBI एक स्वतंत्र नियामक है और उसे हर मामले में निर्देश नहीं दिया जा सकता। बेंच ने कहा कि शिकायत सीधे SEBI के पास ले जानी चाहिए। महुआ लगातार शेयर बाजार से जुड़े मुद्दों पर SEBI की भूमिका पर सवाल उठाती रही हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को कुछ मामलों में निर्देश देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता। यह मामला शेयर बाजार और नियामक एजेंसी से जुड़ा था। दरअसल, महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में SEBI से जुड़े एक मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि SEBI अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है और कुछ मामलों में जानबूझकर देरी की जा रही है। मोइत्रा ने कोर्ट से मांग की थी कि SEBI को समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाए।
जस्टिस की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि SEBI एक स्वतंत्र नियामक संस्था है और कोर्ट हर मामले में उसे निर्देश नहीं दे सकता। बेंच ने कहा, "SEBI अपने नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। अगर हर मामले में कोर्ट निर्देश देने लगे, तो नियामक की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।" कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पास जो भी शिकायत या सबूत हैं, वह सीधे SEBI के पास जा सकते हैं। SEBI उस पर नियमानुसार कार्रवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका के नाम पर नियामक संस्थाओं के काम में दखल देना सही नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की, "हम SEBI को कैसे निर्देश दे सकते हैं कि वह क्या करे और क्या न करे? SEBI एक एक्सपर्ट बॉडी है। उसे अपना काम करने दीजिए। अगर कोई गड़बड़ी है, तो उसके लिए अलग कानूनी रास्ते हैं।"
महुआ मोइत्रा लगातार शेयर बाजार और कॉरपोरेट मामलों को लेकर मुखर रही हैं। उन्होंने इससे पहले भी अडानी ग्रुप से जुड़े मामले में SEBI की जांच पर सवाल उठाए थे। इस नई याचिका में भी उन्होंने इसी तरह के मुद्दे उठाए थे कि बाजार में कुछ बड़े खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है और छोटा निवेशक नुकसान में है। मोइत्रा का कहना था कि SEBI को निवेशकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा। उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि SEBI को एक निश्चित समय-सीमा में अपनी जांच पूरी करने और उसे सार्वजनिक करने का आदेश दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक, यह याचिका शेयर बाजार में कथित हेरफेर और कुछ कंपनियों के शेयरों में असामान्य तेजी से जुड़ी थी।
महुआ मोइत्रा ने दावा किया था कि इसमें कुछ विदेशी फंड्स की भूमिका है, जिसकी जांच SEBI को करनी चाहिए। लेकिन SEBI की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अगर SEBI जांच नहीं कर रहा है, तो याचिकाकर्ता पहले SEBI के पास ही अपील करे। सीधे सुप्रीम कोर्ट आना सही तरीका नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी ने महुआ मोइत्रा पर निशाना साधा है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि महुआ मोइत्रा हमेशा सुर्खियों में रहने के लिए इस तरह की याचिकाएं दायर करती हैं। वहीं, TMC ने कहा कि महुआ मोइत्रा ने जनहित में यह याचिका दायर की थी और कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं।महुआ मोइत्रा की यह याचिका खारिज होने से उन्हें कानूनी तौर पर झटका माना जा रहा है, लेकिन उन्होंने कहा है कि वह निवेशकों के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।




