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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

फ्रीज है TMC का नाम-निशान: SC ने EC से कहा- 4 हफ्ते में दलीलें पूरी, फिर 3 महीने में अंतिम फैसला

TMC के नाम और 'जोड़ा घास-फूल' निशान विवाद पर SC ने EC को डेडलाइन दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, दोनों गुट 4 हफ्ते में दलीलें पूरी करें, फिर EC 3 महीने में अंतिम फैसला ले। ममता बनाम ऋतब्रत गुट में बंटी TMC का नाम-निशान 17 सितंबर से फ्रीज है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
फ्रीज है TMC का नाम-निशान: SC ने EC से कहा- 4 हफ्ते में दलीलें पूरी, फिर 3 महीने में अंतिम फैसला

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब अंतिम पड़ाव पर है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग को डेडलाइन दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग TMC के दो गुटों के बीच 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'जोड़ा घास-फूल' वाले आरक्षित चुनाव चिह्न के विवाद पर 3 महीने के भीतर अंतिम फैसला ले।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने यह आदेश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया के लिए चार महीने की समय-सीमा तय की है: 4 हफ्ते: दोनों गुटों को चुनाव आयोग के सामने अपनी सभी दलीलें, सबूत, हलफनामे और दस्तावेज 4 हफ्ते के अंदर पूरे करने होंगे। 3 महीने: दलीलें पूरी होने के बाद चुनाव आयोग को 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968' के पैरा 15 के तहत 3 महीने के भीतर अंतिम निर्णय देना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह 3 महीने की अवधि 4 हफ्ते की अवधि खत्म होने के बाद शुरू होगी। दरअसल, चुनाव आयोग ने इस मामले में 6 महीने का समय मांगा था। आयोग के वकील ने कहा था कि सबूतों और हलफनामों की संख्या बहुत ज्यादा है, फैसला लेना मुश्किल है।

इस पर जस्टिस बागची ने कहा - "तीन महीने काफी हैं।" जब वकील ने फिर कहा "यह बहुत मुश्किल है", तो बेंच ने कहा - "अगर कोई बहुत जरूरी स्थिति पैदा होती है, तो हमारे पास आएं।" यह विवाद TMC के अंदरूनी बंटवारे से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई में बीजेपी द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद TMC में टूट हुई। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 10 विधायकों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दी। अब दो गुट बन गए हैं - एक AITC-ममता गुट (ममता बनर्जी के नेतृत्व में) और दूसरा AITC-डेमोक्रेटिक गुट (ऋतब्रत बनर्जी का गुट)।

दोनों ही खुद को असली TMC बता रहे हैं। इस विवाद के चलते चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर TMC के मूल नाम और 'फूल और घास' वाले आरक्षित चिह्न को फ्रीज कर दिया था। अंतिम फैसला होने तक कोई भी गुट मूल नाम-निशान का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उपचुनावों को देखते हुए आयोग ने दोनों गुटों को अस्थायी व्यवस्था दी है: 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का निशान। 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' का निशान। 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं, इसलिए यह फैसला अहम हो जाता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन के बाद 'जोड़ा घास-फूल' किसके खाते में जाता है।

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