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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

West Bengal: नंदीग्राम से बड़ी खबर! जेल से बाहर आएंगे कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
West Bengal: नंदीग्राम से बड़ी खबर! जेल से बाहर आएंगे कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। जमानत के साथ कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 21 अक्टूबर को उन्हें संबंधित अदालत में सरेंडर करना होगा। जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि प्रधान को चुनाव लड़ने का लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें तुरंत अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने यह भी देखा कि प्रधान को नॉमिनेशन पेपर दाखिल करने के बाद हिरासत में लिया गया था।

मिलन प्रधान को मेदिनीपुर जिला पुलिस ने 18 सितंबर को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ खेजुरी और नंदीग्राम थानों में कुल 6 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे गंभीर मामला खेजुरी थाने में दर्ज मामला संख्या 45/2007 है, जिसमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसी धाराएं लगी हैं। यह सभी मामले 2007 में हुए चर्चित नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हैं। उस समय इस आंदोलन का नेतृत्व तत्कालीन विपक्षी नेता ममता बनर्जी ने किया था और मिलन प्रधान आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता थे। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान प्रधान के वकील सीनियर एडवोकेट मिलन मुखर्जी ने दलील दी कि 2007 के बाद से राज्य सरकार ने कभी उनकी तलाश नहीं की और अचानक चुनाव की घोषणा के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने गिरफ्तारी को जायज ठहराया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे साबित हो कि 2007 के बाद प्रधान फरार थे। इससे पहले 24 सितंबर को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने प्रधान को 12 अक्टूबर तक नए मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था। कोर्ट ने सवाल भी उठाया था कि 19 साल पुराने मामले में चुनाव से ठीक पहले पुलिस इतनी सक्रिय क्यों हुई। हालांकि राज्य सरकार ने इस आदेश को मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच में चुनौती दी। डिवीजन बेंच ने 25 सितंबर को वह संरक्षण वापस ले लिया था और कहा था कि कानून सभी के लिए समान है, चुनाव लड़ने से कोई वीआईपी नहीं हो जाता।

नंदीग्राम उपचुनाव का राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा है। 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होनी है। पहले तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था और उसके कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हो गई थी, जिसे विपक्ष ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। अब अंतरिम जमानत मिलने के बाद मिलन प्रधान 21 अक्टूबर तक चुनाव प्रचार कर सकेंगे। हालांकि 21 अक्टूबर को उन्हें फिर से कोर्ट में सरेंडर करना होगा, जिसके बाद उनकी नियमित जमानत पर सुनवाई होगी।

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